Saushruta Nighantu
Acharya Balakrishna · Divya Prakashan
सौश्रुत-निघणटृः- आयुर्वेद ऋषियों की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है । इसमें अधिकांश चिकित्सा जड़ी - बूटियों द्वारा की जाती है । जड़ी - बूटियों के परिचय हेतु भारतवर्ष में आयुर्वेदीय वाङ्मय के अन्तर्गत निघण्टु - ग्रन्थों ( औषधीय परिचय कोषों ) की रचना की जाती रही है । इनमें औषधद्रव्यों के स्वरूप , पर्याय शब्द , गुण एवं रोगों में उपयोगिता आदि का वर्णन होता है । औषधीय द्रव्यों की सर्वांगीण जानकारी के लिए निघण्टु - ग्रन्थों का अध्ययन प्रत्येक वैद्य के लिए अनिवार्य माना जाता है । निघण्टु ग्रन्थों की इस प्राचीन श्रृंखला में सुश्रुतसंहिता से सम्बद्ध सौश्रुतनिघण्टु उपलब्ध होता है । पर्यायसंकलनात्मक शैली में रचित इस निघण्टु में सुश्रुतसंहिता , सूत्रस्थान के ३८ वें द्रव्यगणसंग्रहाध्याय के विदारिगन्धादिगण से लेकर तृणपञ्चमूलगण तक वर्णित द्रव्यों के पर्यायों का संकलन किया गया है । इसके अतिरिक्त अन्य प्रकीर्णद्रव्यों के पर्याय भी इसमें संकलित हैं । आयुर्वेद - मनीषी आचार्य श्री बालकृष्ण जी ने इसका परिष्कार कर पहली बार हिन्दी व्याख्या के साथ इसे प्रकाशित किया है । यह आयुर्वेदीय वाङ्मय की श्रीवृद्धि एवं रक्षा हेतु आचार्य श्री का महनीय अवदान है और आयुर्वेद जगत् के लिए एक विशेष उपलब्धि है । इस संस्करण में सौश्रुतनिघण्टु में वर्णित औषधीय - द्रव्यों के नामों के साथ वानस्पतिक नाम भी प्रस्तुत किए हैं । इससे यह संस्करण आयुर्वेद - जिज्ञासुओं के लिए विशेष रूप से उपादेय बन गया है । आशा है इस ग्रन्थ के प्रकाशन से ऋषियों की सस्ती , सुलभ एवं निरापद चिकित्सा पद्धति के प्रति श्रद्धा बढ़ेगी । और आयुर्वेद के प्रचार - प्रसार को बल मिलेगा ।
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