रुचिवधू-गल-रत्नमाला / Ruchivadhu-Gul-Ratnamala

रुचिवधू-गल-रत्नमाला / Ruchivadhu-Gul-Ratnamala

Acharya Balkrishna · Divya Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: First

₹110

रुचिवधू - गल - रत्नमाला आयुर्वेद एवं पाकशास्त्र से सम्बद्ध एक प्राचीन रचना है । इसमें विविध प्रकार के ऐसे निरामिष ( शाकाहारी ) सात्विक व्यंजनों का काव्यमय शैली में वर्णन है , जो अरुचि व मन्दाग्नि को दूर कर विशेष रूप से स्वास्थ्य - वर्द्धक होते हैं । प्राचीन काल में मूलतः संस्कृत में लिखी गई तथा अब तक अप्रकाशित इस पुस्तिका को आयुर्वेद - मनीषी श्रद्धेय आचार्य श्रीबालकृष्ण जी ने सुसम्पादित रूप में पहली बार सरल हिन्दी अनुवाद साथ प्रस्तुत किया है । यह रुचिकर एवं सुपाच्य भोजन की जानकारी के लिए पठनीय रचना है । आचार्यश्री ने इसकी भूमिका के अनन्तरवर्ती भाग में चरकसंहिता आदि आयुर्वेदीय ग्रन्थों के आधार पर भोजन के प्रति होने वाली अरुचि ( अरोचक रोग ) के कारणों का विवरण प्रस्तुत करते हुए इसके निवारण हेतु सरल चिकित्सा का वर्णन किया है । इसी प्रसंग में स्वास्थ्य के लिए स्वर्णिम सूत्र मिताहार का विवेचन करते हुए चरक संहिता के आधार पर आहार - मात्रा के विषय में बहुत ही उपयोगी एवं मार्मिक जानकारी दी है , जो प्रत्येक आरोग्याभिलाषी व्यक्ति के लिए अत्यन्त आवश्यक है । हमारा स्वास्थ्य मुख्यतः समुचित भूख लगने व सन्तुलित आहार लेने पर निर्भर है । कहा भी है- सारमेतच्चिकित्साया यदग्नेः परिपालनम् , अर्थात् जठराग्नि ( भूख ) को सन्तुलित बनाए रखना ही चिकित्सा का सार है । प्रस्तुत पुस्तिका अरुचि व मन्दाग्नि को दूर कर क्षुधा जागृत करने वाले उत्तमोत्तम स्वादु व्यंजनों की जानकारी देकर आरोग्यलाभ में सहायक सिद्ध होगी । अतः स्वाध्यायशील पाठक इस पुस्तिका का अध्ययन कर अवश्य लाभान्वित होवें । सर्वे सन्तु

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