Teesara Netra - Part 1 | The Third Eye
Arun Kumar Sharma · Astha Prakashan
हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण और सबसे मूल्यवान कोई अंग है तो वह है नेत्र । महत्वपूर्ण और मूल्यवान होने का कारण यह है कि इसका सीधा संबंध स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और मनोमय शरीर से जुडा हुआ है। नेत्र हमारे तीनो शरीरों की स्थितियों और उनके क्रिया-कलापों को बराबर अभिव्यक्त करते रहते हैं। जिस व्यक्ति का स्थूल शरीर स्वस्थ और निरोग होता है, उसके नेत्र चंचल, अस्थिर और धूमिल होते है। जिस व्यक्ति का सूक्ष्म शरीर स्वस्थ विकसित और उन्नत होता है उसके नेत्र स्थिर तेजोमय और प्रखर होते हैं। इसी प्रकार जिस व्यक्ति का मनोमय शरीर स्वस्थ विकसित और उन्नत होता है उसके नेत्र स्थिर तेजोमय और प्रखर होने के अतिरिक्त सम्मोहन से भरे स्वप्नालु भी होते है। बार-बार पलकों का गिरना कमजोर इच्छाशक्ति का सूचक है। नेत्रों की अपनी अलग भाषा है। जितने भी भाव हैं और जितने भी विचार हैं, ये सब उसी के द्वारा प्रकट होते है। जो लोग नेत्रों की भाषा पढ़ना जानते हैं, वे किसी के भी नेत्रों को देखकर उसके भावों को समझ सकते है और उसके विचारों को जान सकते हैं।
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