Karana Patra | साधक दर्शन और योग - तांत्रिक साधना प्रसंग

Karana Patra | साधक दर्शन और योग - तांत्रिक साधना प्रसंग

Pt. Arun Kumar Sharma · Astha Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: First

₹225 ₹300 25% off

इन सारी विशेषताओं को उपलब्ध होने पर ही तुम प्रच्छन्न और अप्रच्छन्न सिद्ध साधकों योगियों और सन्त महात्माओं का सान्निध्य प्राप्त कर सकोगे और उनकी मति-गति अथवा गतिविधि भी समझ सकते हो। कुछ समय तक आध्यात्मिक चर्चा करने के बाद कपिलकुण्डल चले गये। उसके बाद भी कई बार सशरीर उपस्थित हुए कपिलकुण्डल और उनके माध्यम से साधक मण्डली के कई साधको से मेरा सम्पर्क हुआ और हुआ आध्यात्मिक लाभ भी।मैत्री, करुणा, मुदिता और उपेक्षा ये चारो दार्शनिक तत्व धीरे-धीरे मेरे जीवन के अंग बन गये जैसे। जिसका परिणाम यह हुआ कि मेरे अन्तर्मुखी और बहिर्मुखी दोनो अस्तित्व में परमशान्ति का साम्राज्य स्थापित हो गया और भर गयी परम आत्मविश्वास से मेरी आत्मा और उसी के साथ एक ऐसी अतीन्द्रिय संवेदना भी मुझमें उत्पन्न हो गयी जिससे मोह-माया, आकर्षण और राग-अनुराग से मुक्त होकर सत्य का साक्षात्कार करने लगी मेरी अन्तरात्मा । जिसके फलस्वरूप अपने शोध तथा अन्वेषण के मार्ग में पूर्ण रूप से सफलता प्राप्त होने लगी और उसी के साथ-साथ अपने आप सम्पर्क स्थापित होने लगा प्रच्छन्न-अप्रच्छन्न सिद्ध साधको योगियो और सन्त महात्माओं से। उनसे जितना जो कुछ योग-तंत्र से संबंधित ज्ञान प्राप्त हुआ और उस ज्ञान के जिन आध्यात्मिक स्वरूपो से परिचित हुआ उन्ही सब में से कुछ को 'कारणपात्र' में एकत्र करने का प्रयास किया है मैंने। आध्यात्मिक जगत में षोडश कला पूर्णावस्था का द्योतक मानी जाती है। किन्तु फिर भी श्री शर्माजी के अथाह ज्ञान सागर के सोलह बूंद ही समझे जायेंगे वे सोलह कलात। और उन्ही सोलह कलश में से एक कलश को मैंने शीर्षक दिया है 'कारणपात्र' । तांत्रिक भाषा में मदिरा को कारण कहते है। प्रस्तुत पुस्तक में जिन साधकों का उल्लेख है उनके द्वारा मदिरा का उपयोग साधना की दृष्टि से अधिक किया गया है इसलिए पुस्तक का शीर्षक कारण पात्र है

ISBN-139788190679664
AuthorPt. Arun Kumar Sharma
PublisherAstha Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionFirst
Pages279
Year2020

Category: Religion & Spirituality

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