Colorectal Diseases & Kshar Sutra Surgery : क्षारसूत्र कर्म विज्ञान-सचित्र
Dr Balendra Singh, Dr Shweta Singh · Chaukhambha Vishvabharati
प्रस्तुत पुस्तक 'क्षारसूत्र कर्म विज्ञान' की रचना आयुर्वेद के स्नातक व स्नातकोत्तर (शल्यतंत्र) छात्रों व शल्य चिकित्सकों (आयुर्वेद) के लिए की गई है, विषयवस्तु को संक्षिप्त परन्तु सारगर्भित करने का प्रयास किया गया है, जिससे कि अध्ययनकर्ता को स्पष्ट रूप से समझने में सहायता मिल सके। संपूर्ण पुस्तक को शास्त्रीय संदर्भों, रेखाचित्र व वास्तविक चित्रों के माध्यम से विषय को सरल एवं बोधगम्य बनाने का प्रयास किया गया है। यथावश्यकता इसमें आधुनिक युगानुरुप विषयवस्तु को सचित्र प्रस्तुत किया गया है ताकि पुस्तक अपने आप में परिपूर्ण हों। पुस्तक लेखन का यह हमारा प्रथम प्रयास है। इस पुस्तक में 18 अध्यायों का वर्णन किया गया है। इसमें त्रिविध कर्म के साथ-साथ क्षारसूत्र निर्माण का सचित्र विस्तृत वर्णन किया गया है। इसमें विबंध, गुदविद्रधि व भगन्दर का स्वतंत्र एवं विस्तृत वर्णन किया गया है। भगन्दर रोग में भगन्दर के भेदो को एक्स-रे चित्र (फिस्टुलोग्राम) के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया है। गुद विदार में औषध चिकित्सा के साथ-साथ शस्त्र कर्म का वर्णन किया गया है तथा बाह्य अर्श युक्त चिर गुद विदार की चिकित्सा में क्षारसूत्र कर्म का सचित्र वर्णन किया गया है। अर्श रोग की चिकित्सा में क्षार व क्षारसूत्र कर्म के साथ आधुनिक चिकित्सा पद्धति जैसे स्केलेरोथिरेपी व रबर बैंड बंधन का सचित्र वर्णन किया गया है। आंशिक गुद भ्रंश की चिकित्सा में क्षारसूत्र का प्रयोग किया गया है। इस पुस्तक में गुद जन्य व्याधियों के अतिरिक्त अन्य स्थानों में होने वाले रोग जैसे चर्मकील व मषक की चिकित्सा में क्षारसूत्र प्रयोग का सचित्र वर्णन किया गया है। हमें आशा है कि यह प्रकाशन विद्यार्थियों, अध्यापकों और शल्य चिकित्सकों के लिए क्षारसूत्र कर्म को बेहतर तरीके से समझने तथा प्रयोग करने में उपयोगी सिद्ध होगा।
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