Pahaad: Apne Mulk -Apne Gaon

Pahaad: Apne Mulk -Apne Gaon

Dr. Narendra Singh Bhandari · Kitab Mahal

Hindi · Paperback · Edition: First

₹128 ₹150 15% off

पहाड़ का संघर्षमयी जीवन किसी से छुपा नहीं है। इस पहाड़ में संघर्षोंों की कई गाथाएं छुपी हैं। पहाड़ में रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा एवं अनेकानेक आवश्यक संसाधनों का अभाव रहता है। इन आवश्यक संसाधनों की पूर्ति के लिए जीवनपर्यंत यहाँ का जनमानस संघर्ष करता है। 'पहाड़ अपने मुलुक अपने गाँव' उपन्यास हमारे पहाड़ की मार्मिक स्थिति का हृदयस्पर्शी वर्णन है। यह उपन्यास जहाँ एक ओर रोजगार, शिक्षा के लिए गाँवों से हो रहे पलायन की स्थिति को उठाता है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ की बोली-भाषा, समाज-संस्कृति, तीज-त्योहार, लोकपर्व, रीति-रिवाज आदि का मनमोहक चित्र वर्णन करता है। इनके अलावा धारा-370, भारत-पाक संबंध, सीमा पर तैनात जवानों एवं सीमा पर तनाव से उनके परिवारों की मानसिक स्थिति तथा उनके घर आने के इंतजार का मार्मिक जिक्र करता है। यह उपन्यास विभिन्न पात्रों के माध्यम से पहाड़ के प्रति लगाव रखने, इसकी भाषा-संस्कृति से जुड़ने के लिए युवाओं का आह्वान भी करता है। आधुनिक समय में समाज में परिवर्तन हो रहे हैं, जिसका प्रभाव पहाड़ी अंचल पर भी पड़ा है। यहाँ के जनजीवन, समाज-संस्कृति में भी वह परिवर्तन दृष्टिगोचर होता है। इन सभी गंभीर बिंदुओं पर चर्चा करता हुआ, यह उपन्यास पाठकों की जिज्ञासा को जगाने का प्रयास करता है कि आगे अब क्या होगा? आधुनिकता की चकाचौंध में यह उपन्यास पहाड़ की संस्कृति व परिवेश को श्रेष्ठ सिद्ध करता है एवं पलायन, बेरोजगारी के समाधान के साथ ही भावी पीढ़ी को अपनी संस्कृति की जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा देता है।

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