Paryaavaran Shiksha

Paryaavaran Shiksha

Akhilesh Kumar Srivastava · Kitab Mahal

Hindi · Paperback · Edition: First

₹179 ₹210 15% off

प्रकृति और मनुष्य का संबंध पुराना है, पर्यावरण और जीवन की अभिन्नता से सभी परिचित है। पर्यावरण की स्वच्छता, निर्मलता और संतुलन से ही संसार को बचाया जा सकता है, जैसे-जैसे विकास की गति बढ़ रही है वैसे-वैसे मनुष्य का जीवन संकटमय होता जा रहा है। और पृथ्वी के पंचतत्वों का संतुलन बिगड़ रहा है वहीं प्रकृति विकराल रूप धारण कर प्रलय को आतुर है तथा तरह-तरह की बीमारियाँ हर दिन, प्रतिवर्ष महामारी का रूप धारण कर रही हैं, जिससे छुटकारा पाना कठिन हो रहा है। सभी जीव-जन्तुओं की आवश्यकताओं की पूर्ति धरती माता करती है तो ऐसे में उसे सुरक्षित रखने का वैज्ञानिक एवं विवेकपूर्ण उपाय की खोज अनिवार्य है, और यह संभव है, शिक्षण व्यवस्था में पर्यावरण पाठ्यक्रमों की अनिवार्यता से । यह पुस्तक पर्यावरण के इन्हीं माप दण्डों पर आधरित है जिसके माध्यम से हम नैतिक बौद्धिक क्रान्ति लाकर अपने पर्यावरण व अपने जीवन को सुरक्षित रख सकते हैं, चूंकि शिक्षण सम्प्रेषण का ऐसा सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति चेतना जागृत कर समाज को एक नई दिशा प्रदान की जा सकती है। प्रकृति पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधन हमारे लिए कितने अनिवार्य है इसका ज्ञान हमें हमारे वेद पुराणों के माध्यम से आदिकाल से दिया जा रहा है। धरती हमारी माता के समान है वह हमें सुविधायुक्त जीवन प्रदान करती है। पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश सभी वृक्ष वनस्पति आदि देवता हैं, जो हमारी रक्षा और पोषण करते हैं। इसलिए हम इनके प्रति कृतज्ञ हैं। आज पुनः इसी भाव की आवश्यकता है। आशा है प्रस्तुत पुस्तक “पर्यावरण शिक्षा” इस उद्देश्य की पूर्ति में सहायक सिद्ध होगी।

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