Sahitya Aur Cinema
Dr. Lalit Chandra Joshi · Raghav Publications
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'साहित्य' एवं 'सिनेमा' का गहरा संबंध है। 'साहित्य' को समाज का दर्पण कहा जाता है। यदि इस दृष्टि से सिनेमा को देखा जाए तो सिनेमा को समाज की अन्तर्शिराओं में बहने वाला रक्त कहा जा सकता है। समाज के बिना 'साहित्य' और 'साहित्य' के बिना 'सिनेमा' अधूरा है। 'साहित्य' और सिनेमा एक सशक्त माध्यम हैं। सिनेमा का भारतीय साहित्य से काफी नजदीक का संबंध है। यह. पुस्तक सिनेमा और साहित्य के अंतसंबंधों पर सूक्ष्म दृष्टि केंद्रित करती है।
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