Srjanaatmak Lekhak
Dr. Lalit Chandra Joshi · Raghav Publications
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बिना सृजन के हम कोई विशेष उपलब्धि नहीं पा सकते। यदि लेजन में सृजनशीलता नहीं है तो पाठ्य सामग्री मन-मस्तिष्क में प्रभाव नहीं डालेगी। एक नवीन विचार को हम अपने कौशल से बेहतर बना सकते हैं तथा सतत् अभ्यास से हम सृजनात्मक लेखन को बेहतर बना सकते हैं। सृजनात्मक लेखन में कलात्मकता, मौलिकता, लालित्य एवं अनुरंजकता आवश्यक है। सृजनात्मक लेखन के लिए प्रतिमा का विकास होना जरूरी है। यह पुस्तक सृजनात्मक लेखन के विविध पहलुओं पर अपनी दृष्टि डालती है।
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