Guru Teg Bahadur: Jivan Ki Kala

Guru Teg Bahadur: Jivan Ki Kala

Dr. Surjit Singh Gandhi · Kitab Mahal

Hindi · Paperback · Edition: First

₹128 ₹150 15% off

सम्पूर्ण मानवता के लिए सदभावना और मानवाधिकारों की रक्षा ही गुरु तेग बहादुर के जीवन का सार था। महान ऋषियों और सन्तों के उपदेशों के बावज मानव में हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। निम्न स्तरीय मानवीय प्रवृत्ति मानव पर अधिपत्य जमा रखा है। इन निम्न स्तरीय प्रवृत्तियों का त्याग कर लिए मानव को धर्म की शरण में ही जाना होगा। धर्म तो एक व्यवहार है, आचरण है जिसे आप तभी प्राप्त कर सकते हैं, जब आप निम्नस्तरीय मानव प्रवृत्तियों के विरुद्ध युद्ध छेड़ देते हैं। गुरु तेग बहादुर द्वारा जो सामाजिक और आध्यात्मिक अलख जगाई गयी थी, बदलते माहौल एवं समय में नये भारत के निर्माण में उसकी अधिक आवश्यकता महसूस हो रही है। आज की बहुत गहरी आवश्यकता है कि गुरु तेग बहादुर के जीवन पर पुनर्विचार कर गुरु के नये संकल्पों को पुनः स्थापित किया जाए, जिससे कि चिंतन और विचार की नयी धारा की शुरुआत हो सके। इससे न सिर्फ नये विचारों के चेतन में उतरने की प्रक्रिया ही गतिमान होगी, बल्कि यह नव मानव एवं नव देश के निर्माण में भी सहायक होगी। गुरु तेग बहादुर के जीवन के बारे में पढ़ना और उनके द्वारा जीवन की कला को समझना हमें अंधेरे में प्रकाश की एक नयी रोशनी दिखाता है। वैज्ञानिकता के आधार पर परखा जाए तो गुरु तेग़ बहादुर का शरीर और जीवन विकारों के प्रयोग की एक सफल प्रयोगशाला है, जो पूरी सभ्यता को जीवन की कला पर चलने के लिए प्रेरित करती है। वह यह नहीं बताते कि जीवन कैसा हो? जीवन की समस्यायों के संदर्भ में हम निर्णय कैसे लें? जीवन की प्राथमिकताएं क्या होनी चाहिए? हमारा आचार-विचार एवं व्यवहार कैसा होना चाहिए? वे जीवन के सभी पक्षों के लिए उपदेश नहीं करते हैं बल्कि उसे कैसे जीया जाये, स्वयं उस पर चलकर हमारे सामने जीवन की कला को प्रस्तुत करते हैं। यह पुस्तक गुरु तेग बहादुर जीवन की कला, वर्तमान परिस्थितियों में हमें जीवन जीने की नयी राह दिखाती है। हमारे जीवन की सभी समस्याओं को सुलझाते हुए व्यवहारिक संदर्भ में जीवन जीने की एक विकसित दृष्टि भी प्रदान करती है।

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