Aroyga Kalpdrum : Keraliya Ayurvediya Balchikitsa Kaumarabhritya
Dr. Kalpna Paatni , Prof. Devendranath Mishr · Chaukhamba Sanskrit Pratishthan
प्रस्तुत ग्रंथ आरोग्य कल्पद्रुम 'अभ्युदय हिंदी टीका' प्रसिद्ध केरलीय बालचिकित्सा विषयक आधार ग्रंथ 'आरोग्य कल्पद्रुम' की हिन्दी व्याख्या है। इस पुस्तक में कौमारभृत्य के क्षेत्र में केरलीय चिकित्सा पद्धति के कई रहस्यों को उद्घाटित किया गया है। बालकों में होने वाले विभिन्न रोगों के निदान, लक्षण एवं चिकित्सा का वर्णन इस ग्रंथ की मौलिकता है। साथ ही दक्षिण भारत में उपलब्ध औषधीय पौधों एवं औषध-योगों के उपयोग का भी विशद विवरण मिलता है। ग्रंथ में अनेक नवीन व्याधियों का उल्लेख मिलता है, यथा-रक्तस्तंभ, रक्तानवस्था, कुण्डालक, जठरव्रण, उल्वारुषि, रक्तालसक, पिटका, पक्षिपीड़ा इक्यावन प्रकार के विसर्प रोग. अठारह प्रकार के अपस्मार, आठ प्रकार के शाखा रोग आदि। विष चिकित्सा, प्राकार योग, प्रत्यौषध चिकित्सा, द्रव्यशुद्धि आदि अध्याय इस ग्रंथ का वैशिष्ट्य हैं। प्रस्तुत टीका में मूल ग्रंथ के विश्लेषण के साथ ही स्थान-स्थान पर आचार्य कश्यप, आचार्य चरक आचार्य सुश्रुत, आचार्य वाग्भट् एवं आधुनिक मतों का प्रतिपादन करते हुए तुलनात्मक व्याख्या भी की गई है। विषयवस्तु को सुग्राह्य बनाने हेतु आवश्यकतानुसार टेबल एवं फ्लोचार्ट द्वारा निरुपण किया गया है। प्रस्तुत ग्रंथ एक सेतु के रूप परम्परागत केरलीय बाल चिकित्सा पद्धति के ज्ञान से अध्येताओं को परिचित एवं लाभान्वित कराने का प्रयास है। यह ग्रंथ कौमारमृत्य के छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं चिकित्सकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।
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