Shukla Yajurveda Samhita (Text With Padapaath And Hindi Translation)
Uma Shankar Sharma Rishi · Chaukhambha Classica
1. इसमें वाजसनेयि-माध्यन्दिन संहिता के सस्वर संहिता पाठ और पद-पाठ का भी शुद्धतम संस्करण दिया गया है जिससे मूल मन्त्रों के पदों की पहचान हो सके। 2. हिन्दी भाष्य या टीका में अनुवाद अन्वय-क्रम से दिया गया है। साथ ही अनुवाद में दिये गये शब्दों के साथ ही मूल वैदिक पदों या पद-समूहों को भी कोष्ठकों में रखा गया है। 3. मूल वैदिक पदों की व्याकरणिक विशिष्टता भी समझायी गई है, इसे अनुवाद के भीतर ही कोष्ठकों में अथवा 'विशेष' के अन्तर्गत दिया गया है जिससे जिज्ञासुओं में पदों के ज्ञान की उत्सुकता का समाधान हो। इससे पाठक स्वयं भी मन्त्रार्थ के विषय में नई उद्भावना कर सकते हैं। 4. हिन्दी भाष्य मूलतः उवट और महीधर के प्रामाण्य पर किया गया है अतः सम्बद्ध श्रौतसूत्र के आधार कर्मकाण्डीय टिप्पणियाँ दी गई हैं। शतपथ ब्राह्मण के सम्बद्ध उद्धरणों से अर्थ-विषयक शंकाओं के निवारण का प्रयास है। 5. आवश्यकतानुसार पाश्चात्त्य मत भी प्रस्तुत किये गये हैं। २३वें अध्याय में अश्वमेध के प्रसंग में तथाकथित अश्लील मन्त्रों की व्याख्या नये परिवेश में योगशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में शब्दों के अभिनव अर्थ देते हुए की गई है जिसमें परम्परागत व्याख्या का परिमार्जन हो तथा वैदिक मन्त्रों की सार्थकता रहे। 6. भूमिका में वेदव्याख्या से सम्बद्ध अल्पज्ञात सामग्री का विश्लेषण है। 7. कण्डिका या कण्डिकांश का वैदिक वांग्मय में अन्यत्र निर्देश भी प्रस्तुत किया गया है जिससे उसका महत्त्व ज्ञात हो, विद्यार्थियो, विद्वानों और सामान्य वेदप्रेमियो के लिए सर्वाधिक उपयोगी संस्करण तथा संग्रहणीय स्थायी वैदिक ग्रन्थ ।
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