Shivatandavtalika (Sanskrit Teeka on Shiva Tandav Stotra)
Nityananda Misra · Chaukhambha Classica
सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध शिवताण्डवस्तोत्र का संस्कृत स्तोत्र-साहित्य में अद्वितीय स्थान है। पञ्चचामर छन्द में निबद्ध एवं भक्तिभाव से समृद्ध इस स्तोत्र में ताण्डवकर्ता शिव की स्तुति है। इस स्तोत्र की पाँच-छह छोटी टीकाएँ होते हुए भी इसपर संस्कृत में प्रौढ टीका अत्यन्त दुर्लभ है। संस्कृत टीकाओं की परम्परा का निर्वाह करती हुई और व्याकरण, प्रमाण तथा तर्क से मण्डित यह ‘शिवताण्डवतालिका’ टीका शिवताण्डवस्तोत्र के पद-पद का स्पष्टता से व्याख्यान करती है। टीकाकार काव्य के रसिकों के लिए प्रत्येक पदा का अनुष्टुप् छन्द में पद्यानुवाद भी प्रस्तुत करते हैं। इस टीका के अध्ययन से नए अध्येता भी स्तोत्र के सारतत्त्व को सरलता से समझ सकते हैं और स्तोत्र को आत्मसात् कर सकते हेइं। संस्कृतज्ञ शिवभक्तों के लिए शिवताण्डवतालिका एक महान् निधि जैसी है। Sanskrit Description: अशेषे विश्वे प्रसिद्धं शिवताण्डवस्तोत्रं संस्कृतस्तोत्रसाहित्येऽद्वितीयां पदवीं दधाति। पञ्चचामरच्छन्दोबद्धे भक्तिभावसमृद्ध एतस्मिन् स्तोत्रे ताण्डवकर्तुः शिवस्य स्तुतिर्वरीवर्त्ति। सतीस्वपि स्तोत्रस्यास्य पञ्चषासु लघ्वीषु टीकास्विदमधिकृत्य देववाण्यां प्रौढा टीका सुदुर्लभा। संस्कृतटीकापरम्परां निर्वहन्ती व्याकरणप्रमाणतर्कमण्डितेयं शिवताण्डवतालिका टीका शिवताण्डवस्तोत्रं प्रतिपदं स्फुटतया व्याचष्टे। टीकाकारः काव्यरसिकेभ्यः प्रत्येकं पद्यस्यानुष्टुप्छन्दसि पद्यानुवादमपि प्रस्तौति। अस्याष्टीकाया अध्ययनेन नव्या अध्येतारोऽपि स्तोत्रस्य सारतत्त्वं सौगम्येन बोधितुं शक्नुवन्ति स्तोत्रं चात्मसात्कर्तुं शक्नुवन्ति। संस्कृतज्ञशिवभक्तानां कृते शिवताण्डवतालिका महान् निधिरिव।
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