Yog Shat Vaidhvallbha
Acharya Balkrishna · Divya Prakashan
आचार्य अमितप्रभ (7वीं शती ई.) द्वारा रचित 'योगशत' आयुर्वेद की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एवं लोकप्रिय रचना है। इसमें ग्रन्थकार ने बहुत ही सरल व सरस शैली में १०० श्लोकों में ही आयुर्वेद का सारभूत अमृततत्त्व प्रस्तुत कर दिया है। इस संक्षिप्त किन्तु सारपूर्ण रचना पर शताब्दियों से अनेक संस्कृत-व्याख्याएं लिखी जाती रही हैं। वे व्याख्याएं काल के प्रवाह में सुरक्षित नहीं रह सकीं, परन्तु उन पूर्ववर्ती व्याख्याओं का सार लेकर वैद्याचार्य रूपनयन (१२वीं शती) द्वारा समीक्षात्मक शैली में लिखी गई 'वैद्यवल्लभा' नामक व्याख्या सौभाग्य से भारतवर्ष के कतिपय हस्तलेखागारों में सुरक्षित बच गई। आयुर्वेद-मनीषी श्रद्धेय आचार्य श्रीबालकृष्ण जी ने इस व्याख्या की प्राचीन हस्तलिखित प्रतियों को ढूंढ निकाला तथा उनके आधार पर उत्तम सम्पादन कर इसे पहली बार हिन्दी भाषान्तर के साथ प्रकाशित किया है। यह श्रद्धेय आचार्यश्री का आयुर्वेद के क्षेत्र में महनीय अवदान है तथा आयुर्वेद-जगत् के लिए एक विशिष्ट उपलब्धि है। योगशत-वैद्यवल्लभा में आयुर्वेद के काय-चिकित्सा आदि आठों अंगों के अन्र्तगत चिकित्सा हेतु उत्तमोत्तम चयनित १०० योग (नुस्खे) विशद व्याख्या के साथ प्रस्तुत किए हैं। ये योग अत्यन्त प्रभावशाली हैं तथा इनमें से अधिकांश को सरलता से ग्रामीण क्षेत्र में ही बनाया जा सकता है। ये चिकित्सकीय योग अति प्राचीन काल से सुपरीक्षित हैं तथा वैद्य-समाज में परम्परागत रूप से प्रचलित हैं। सदियों से वैद्यजन निरापद रूप से इनके द्वारा चिकित्सा करते आ रहे हैं। चिकित्सा-विधि के साथ ही इस पुस्तक में स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य-रक्षण हेतु वात, पित्त एवं कफ के स्वरूप, प्रकोप के कारण एवं प्रशमन के उपायों की जानकारी दी गई है, जो प्रत्येक आरोग्याभिलाषी के लिए अत्यन्त आवश्यक है। इसमें त्रिदोष के शोधन हेतु पञ्चकर्म का भी निरूपण किया है, जो आयुर्वेदीय चिकित्सा पद्धति का एक महत्त्वपूर्ण एवं प्रभावशाली अंग है। सामान्य जन भी इस सारपूर्ण एवं सुगम पुस्तक को पढ़कर आयुर्वेदीय चिकित्सा पद्धति एवं सिद्धान्तों से भली-भांति परिचित हो सकते हैं तथा तद्नुसार अपने जीवन को स्वस्थ व सुखी बना सकते हैं।
| ISBN-13 | 9789352357888 |
|---|---|
| Author | Acharya Balkrishna |
| Publisher | Divya Prakashan |
| Language | Sanskrit-Hindi |
| Binding | Hardcover |
| Edition | First |
| Pages | 480 |
| Year | 2014 |
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