Laghu Nighantu
Acharya Balkrishna · Divya Prakashan
यह पुस्तक एक प्राचीन साहित्य है, जिसमें प्राचीन आयुर्वेदिक पौधों और औषधियों का विवरण शामिल है। लघुनिघण्टुः आयुर्वेद ऋषियों की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है। इसमें अधिकांश चिकित्सा जड़ी-बूटियों द्वारा की जाती है। जड़ी-बूटियों के परिचय हेतु भारतवर्ष में आयुर्वेदीय वाङ्मय के अन्तर्गत निघण्टु-ग्रन्थों (औषधीय परिचय कोषों) की रचना की जाती रही है। इनमें औषधद्रव्यों के स्वरूप, पर्याय शब्द, गुण एवं रोगों में उपयोगिता आदि का वर्णन होता है। औषधीय द्रव्यों की सर्वांगीण जानकारी के लिए निघण्टु-ग्रन्थों का अध्ययन प्रत्येक वैद्य के लिए अनिवार्य माना जाता है। निघण्टु ग्रन्थों की इस प्राचीन श्रृंखला में गुजरातनिवासी वैद्य केशवराम व्यास ने लघुनिघण्टु की रचना की थी। इसमें संक्षिप्त रूप से आयुर्वेदिक औषधीय द्रव्यों का वर्णन किया गया है। ग्रन्थकार की पद्यरचना-शैली बहुत सरस एवं सुललित है। इसकी रचना विविध छन्दों में की गई है। लघुनिघण्टु का उपलब्ध संस्करण अशुद्धिबहुल था। आयुर्वेद-मनीषी आचार्य श्री बालकृष्ण जी ने इसका परिष्कार कर पहली बार हिन्दी व्याख्या के साथ इसे प्रकाशित किया है। यह आयुर्वेदीय वाङ्मय की श्रीवृद्धि एवं रक्षा हेतु आचार्य श्री का महनीय अवदान है और आयुर्वेद जगत् के लिए एक विशेष उपलब्धि है। इस संस्करण में लघुनिघण्टु में वर्णित औषधीय द्रव्यों के नामों के साथ वानस्पतिक नाम एवं चित्र भी प्रस्तुत किए हैं। इससे यह संस्करण आयुर्वेद-जिज्ञासुओं के लिए विशेष रूप से उपादेय बन गया है। आशा है इस ग्रन्थ के प्रकाशन से ऋषियों की सस्ती, सुलभ एवं निरापद चिकित्सा पद्धति के प्रति श्रद्धा बढ़ेगी और आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार को बल मिलेगा।
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