Rahasya रहस्य: सत्य घटनाओं पर आधारित अविश्वसनीय रहस्य कथाएँ
Pt. Arun Kumar Sharma · Astha Prakashan
प्रस्तुत संग्रह का शीर्षक है 'रहस्य'। 'रहस्य' इसलिए है कि उसके अन्तर्गत जो भी कथाएँ संकलित की गयी है। वे सभी किसी न किसी रूप में स्वयं में रहस्यों से भरी हुई है। सम्भव है उन्हें पढ़कर पाठकों के मन में किसी प्रकार की जिज्ञासा उत्पन्न हो, प्रश्न उत्पन्न हो और हो कौतूहलों की सृष्टि क्योंकि कथाएँ ही ऐसी है। अभौतिक और पारलौकिक ये दो शब्द कोई अर्थ नहीं रखते मेरे लिए क्योंकि ये दोनों परम्परागत शब्द मन की सीमा में आते हैं। यदि हम उन दोनों शब्दों को कल्पना भी मान ले तो फिर भी वे मन की सीमा में बंध जाते हैं। इसलिए कि कल्पना का जन्मदाता मन ही है रही 'रहस्य' की बात वह भी मन की ही उपज है। जिस वस्तु का हमारी बुद्धि विश्लेषण नहीं कर पाती उसके कारण-कार्य को समझ नहीं पाती ठीक-ठीक। मन उस वस्तु को 'रहस्य' कहता है लेकिन जब वही रहस्य किसी कारण और किसी अवस्था में अनावृत्त हो जाता है तो फिर 'रहस्य' रहस्य नहीं रह जाता जैसे अनुभव और अनुभूति है। दोनों में अन्तर है। विशेष प्रयास से 'अनुभव' को किसी न किसी रूप में व्यक्त भी किया जा सकता है, लेकिन अनुभूति को नहीं। अनुभव मन का विषय है और अनुभूति है आत्मा का विषय । अनुभूति आत्मा में होती है और जो विषय आत्मा का होता है, वह साधारणतः कभी भी व्यक्त नहीं हो सकता, न भाव से, न भावना से और न तो शब्द से। अब रही सत्य की बात। सत्य, आत्मा का विषय है। उसे आत्मा के द्वारा ही जाना और समझा जा सकता है। जैसे-जैसे आत्मोन्नति होती जाती है, वैसे ही वैसे सत्य की अनुभूति होती जाती है
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