भारतीय दर्शन: Bhartiya Darshan (vol. 1-2)

भारतीय दर्शन: Bhartiya Darshan (vol. 1-2)

Prof. Baldev Singh Mehra · Abhishek Prakashan

Hindi · Hardcover · Edition: First

₹2,000 20% off

पुस्तक परिचय दर्शन की उत्पत्ति जगत् की उत्पत्ति के साथ ही मानी जाती है, इसका विषय की दृष्टि से अध्ययन अध्यापन भले ही समय की अवधि में बँधा हो। क्यों, कब, कैसे, किसने? आदि प्रश्नों के साथ ही मानव ने दर्शन को पहचाना अथवा इसे जानने का प्रयास किया। विश्व साहित्य में अनेक सभ्यताओं के साथ-साथ उनका दार्शनिक साहित्य भी उपलब्ध है इसी प्रकार भारतीय दर्शन भी वैदिक संहिताओं से प्रारंभ होकर, उपनिषद्, अरण्यक, भारतीय षड् दर्शन-जैन, बौद्ध, चार्वाक आदि दर्शन के अतिरिक्त पुराण साहित्य में, रामायण, महाभारत आदि में दर्शन को व्यापक रूप में वर्णित पाते हैं। इसी के साथ-साथ व्याकरण-दर्शन एवं भाषा-दर्शन के रूप में भी इस विषय को दार्शनिकों ने विषय बनाया है। विभिन्न पाठ्यक्रमों में दर्शन को पूर्ण स्थान प्राप्त है इसी क्रम में भारतीय दर्शन संस्कृत पाठ्यक्रम में निर्धारित है।

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