दशवादरहस्य मीमांसा (वैदिक सृष्टि प्रक्रिया का विवेचन) Dashavadarahasya Mimamsa

दशवादरहस्य मीमांसा (वैदिक सृष्टि प्रक्रिया का विवेचन) Dashavadarahasya Mimamsa

Chanda Kumari · Abhishek Prakashan

Hindi · Hardcover · Edition: First

₹349 ₹350

चन्दा झा द्वारा प्रणीत ग्रंथ "दशवादरहस्य मीमांसा" वैदिक विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण योगदान है। दशवादरहस्यम् नामक यह मूल ग्रंथ वेदविद्यावाचस्पति आचार्य पं० मधुसूदन ओझा द्वारा प्रणीत है, जिन्होंने वेद व्याख्या की एक अभिनव पद्धति का अविष्कार किया जो वेद विज्ञान नाम से अभिहित हुआ। पं० ओझा ने वेद विद्या की व्याख्या हेतु एक विशाल वाङ्‌मय का सृजन किया। इस सम्पूर्ण वाङ्मय को पं० ओझा पाँच भागों में विभक्त करते हैं- कृताः पञ्चविधा ग्रंथाः वेदार्थज्ञानहेतवः । ब्रह्मयज्ञेविवृत्तार्थ वेदाङ्गागमबन्धवः।। पं० ओझा ने वेदार्थ ज्ञान हेतु प्राचीन अपने ग्रंथों को ब्रह्मविज्ञान, यज्ञविज्ञान, इतिवृत्तविज्ञान, वेदाङ्ग‌विज्ञान एवं आगमविज्ञान में विभाजित किया है। ब्रह्मविज्ञान नामक बृहद्ग्रंथ में द्वादशवादों का प्रतिपादन उन्होंने किया है, जैसा कि इन्द्रविजय नामक ग्रंथ में स्वयं लिखते हैं- इतिवृत्तं सदसद् वा रजस्तथाकाशमपरञ्च । आवरणं च तथाम्भोऽथामृतमृत्यू अहोरात्रौ । दैवः संशयवादः सिद्धांतश्च श्रुतानुदिताः । द्वादशवादा विहिताः शास्त्रेऽस्मिन् ब्रह्ममविज्ञाने।। ब्रह्मविज्ञान में वेदोक्त बारहवादों, इतिवृत्तवाद, सदसद्वाद, रजोवाद, व्योमवाद, अपरवाद, आवरणवाद, अम्भोवाद, अमृतमृत्युवाद, अहोरात्रवाद, दैववाद, संशयवाद एवं सिद्धांतवाद का प्रतिपादन किया है। इन बारहवादों में से इतिवृत्तवाद को छोड़कर शेष वादों पर पं० ओझा जी के स्वतंत्र ग्रंथ भी उपलब्ध है। जिनमें प्रत्येक वाद पर विस्तार से चर्चा की गई है। 'दशवादरहस्य मीमांसा' नामक ग्रंथ में इन्हीं एकादशवादों को संक्षेप में विवेचित किया गया है। ऋग्वेद के नासदीय सूक्त में (10/129) मूल रूप से प्रतिपादित इन वादों की समीक्षा दशवादरहस्यम् में की गई है। सिद्धांतवाद वस्तुतः वैदिक सृष्टि विज्ञान का सिद्धांत है।

ISBN-139788183901062
AuthorChanda Kumari
PublisherAbhishek Prakashan
LanguageHindi
BindingHardcover
EditionFirst
Pages224
Year2014

Category: Education & Reference

Buy Now

Related books

India's trusted online book store