अनुपानतरङ्गिणी : AnupanTarangini of Pt. Raghunath Prasad With Shashiprabha Hindi Commentary
Dr. Swaminath Mishra · Chaukhambha Orientalia
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अनुपानतरङ्गिणी की मुख्य विषयवस्तु सप्त धातु एवं उपधातु निरूपण है । प्रथम वीचि में १. स्वर्ण, २. रौप्य, ३. ताम्र, ४. नाग, ५. वङ्ग, ६. यशद और ७. लौह - सप्तधातु का मारण, शोधन एवं उसके गुण दोष का प्रतिपादन हैं । द्वितीया वीचि में हेममाक्षिक, रौप्यमाक्षिक, तुत्थक, हरिताल, नीलाञ्जन, अभ्रक, मनःशिला और खर्पर – इन सात उपधातुओं का मारण, शोधन एवं भस्मशान्ति के उपाय वर्णित हैं । तृतीया वीचि में रस का बुभुक्षितकरण एवं भस्म सेवन, रससिन्दूर के गुण एवं अनुपान विधि का निरूपण है । चतुर्थी वीचि में गन्धक की शुद्धि एवं अनुपान का वर्णन है। पञ्चमी वीचि में उपरसों का अनुपान वर्णित है । षष्ठी वीचि में रत्न, वज्र एवं प्रवाल के अनुपान का निरूपण है ।
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