Apala
Dr. Nirupama Srivastava · Kautilya Books
वैदिक ऋचाओं के सृजन में जिन मातृमेधाओं ने अपना योगदान दिया है उनमें अपाला एक अप्रतिम चरित्र है। गार्गी, मैत्रेयी घोषा, कात्यायनी और लोपामुद्रा तथा अपाला ऐसी ऋषि कन्या ऋषि पत्नियाँ हैं, जिन्होंने अपनी मति से भारतीय संस्कृति को नवीन दिशा प्रदान की है। ऋग्वेद के अष्टम् मंडल के 91 सूक्त में एक से सात तक की रचनाओं की सृजन करती हैं। अपाला एक ऐसा ही उज्ज्वल चरित्र है जो कि अपाला के वृतांत के साथ इंद्र की कथा अनुस्यूत है। इसलिए इसे एक मिथक को चरित्र मान लेने में मुझे कोई हिचक नहीं है। अपाला ऋषि अत्रि और ऋषि-पत्नी अनुसुइया की पुत्री हैं। वह देवहूति और कदर्म की नतिनी हैं। सोम, दुर्वासा और दत्तात्रेय जैसे ऋषिगण उनके सगे भाई हैं, स्वयं पिता अत्रि सप्त ऋषियों में अग्रणी हैं। इस तरह की विशिष्ट अक्षय का और वैचारिक परिवेश में पली और बढ़ी अपाला भारतीय संस्कृति की एक अनूठी कृति है। जिसने भारतीय सामाजिक जीवन को बहुत दूर तक प्रभावित किया है।
| ISBN-13 | 9789360635466 |
|---|---|
| Author | Dr. Nirupama Srivastava |
| Publisher | Kautilya Books |
| Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Subject | General |
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