Aadhunik Buddh Osho
Sushil Sharma · Kautilya Books
ध्यान के बिना आप केवल जीवन की सतह को जानते हैं जीवन के रहस्यों को नहीं।" यह पुस्तक 'आधुनिक बुद्ध ओशो' ओशो के जीवन के प्रारंभिक वर्षों से लेकर उनके अंतिम महाप्रयाण के बीच के जीवन की खोज का सार है। उनके प्रारंभिक बचपन से लेकर उनके अंतिम महाप्रयाण तक एवं विभिन्न विषयों पर उनके विचारों का सार इस पुस्तक में समाहित किया गया है। अधिकांश साधक इस अवलोकन से सहमत होंगे कि भारत में आध्यात्मिक विकास के लिए एक उल्लेखनीय सहायक वातावरण है, क्योंकि इसकी मिट्टी वास्तव में आत्मज्ञान के पूर्व साधकों के अवशेषों से भीगी हुई है। ओशो इस अनुभव पर स्वयं कहते हैं कि "सदियों से भारत आंतरिक यात्रा का प्रतीक रहा है। यह सिर्फ एक राजनीतिक इकाई नहीं है, यह एक आध्यात्मिक घटना है। जहाँ तक हम जानते हैं कि दुनिया भर से लोग अपनी तलाश में भारत आते रहे हैं। इसकी जलवायु में बहुत कुछ छिपा है, इसकी मिट्टी की जीवंतता में बहुत कुछ है।" ओशो हमें सिखाते हैं कि कैसे हम उस ध्यानपूर्ण प्रकृति को पुनः प्राप्त कर सकते हैं जिसके साथ हम इस दुनिया में आते हैं, लेकिन समाज के तरीकों में दीक्षित होने के कारण हम समय के साथ खो जाते हैं। ओशो की ध्यान की मार्गदर्शिका हर किसी को चेतना के परिवर्तन के लिए अपने मन से खुद को अलग करना सिखा सकती है यह मार्गदर्शिका हमारे अंदर एक समझ लाती है कि सतर्क और उत्तरदायी होने का क्या मतलब है। ओशो कहते हैं कि "ध्यान के बिना आप केवल जीवन की सतह को जानते हैं जीवन के रहस्यों को नहीं।"
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