Gurukripa Evam Anya Kahaniyan
Ashutosh Rana · Kautilya Books
कुछ सबक हमें किताबों से नहीं, किसी की मौजूदगी से मिलते हैं। आशुतोष राना इस किताब की शुरुआत एक ऐसे ही पल से करते हैं अपने गुरु के साथ एक लंबी सड़क-यात्रा, जहाँ रफ़्तार बचाने की एक छोटी-सी दलील के जवाब में उन्हें एक ऐसी बात सुनने को मिलती है जो आज भी उनके साथ है: समय बचाया जा सकता है, पर जो रास्ते में देखकर, रुककर, महसूस करके सीखा जाता है, वो कभी वापस नहीं मिलता। इसी सादगी और गहराई से यह किताब आगे बढ़ती है। आगे की कहानियाँ हालात से हार न मानने, अपनी शर्तों पर जीने, और सबसे मुश्किल परिस्थिति में भी अपनी गरिमा न छोड़ने की हैं, एक स्त्री जो अपने हालात से समझौता नहीं करती, एक किसान जो नतीजा दिखे या न दिखे मेहनत नहीं छोड़ता, और एक पिता जो सच्चाई से मुँह मोड़ने की क़ीमत बहुत देर से समझता है। हर कहानी के पीछे एक सीधी बात है भाग्य को बदला नहीं जा सकता, पर उसे जीने का तरीक़ा हमेशा अपने हाथ में होता है। आशुतोष राना जी की भाषा गहरी है, पर बात हर किसी की है संतोष, आत्म-सम्मान, धैर्य और रिश्तों की उन सच्चाइयों की, जिन्हें हम अक्सर जानते तो हैं, पर जीना भूल जाते हैं।
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