Ramayankaleen Janakpur Ayodhya Marg Ka Punarveshan: Aadhunik Yug Mein Iski Prasangikta

Ramayankaleen Janakpur Ayodhya Marg Ka Punarveshan: Aadhunik Yug Mein Iski Prasangikta

Dr. Hari Bansh Jha · Kautilya Books

Hindi · Paperback · Edition: N/A

₹350

यह पुस्तक, जो रामायणकालीन जनकपुर-अयोध्या मार्ग पर आधारित है, दिखाती है कि इस पवित्र मार्ग पर यात्रा करने वाले तीर्थयात्री कैसे सीता माता और भगवान राम के आदर्शों को आत्मसात कर सत्य, धर्म और भक्ति की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं। यह उन स्थलों पर आध्यात्मिक केंद्रों के निर्माण के लिए प्रेरित करेगी, जहाँ सीता, राम और बाराती ने रातें बिताई थीं, जिससे ध्यान और अध्ययन का वातावरण बनेगा। यह कृति समाज में सद्गुण, नैतिक चेतना और धर्मपरायण जीवन को प्रोत्साहित करते हुए एक आध्यात्मिक पुनर्जागरण की शक्ति रखती है - श्री राम तपेश्वर दास, महंत, जानकी मंदिर, जनकपुर, नेपाल। प्रो. हरिबंश झा की यह पुस्तक जनकपुर और अयोध्या जैसे प्राचीन त्रेतायुगीन नगरों को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से पुनः जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। पुस्तक में भारत और नेपाल में स्थित श्रीराम और माता जानकी से जुड़े हुये अनेक तीर्थस्थलों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है। यह मार्ग भक्तों के हृदय को आलोकित करने वाला है। इस पुस्तक में बहुत ही गहनता व तमाम परिचर्चाओ के उपरान्त लेखन कार्य किया ज्ञान है। प्रो. झा को उनके इस कार्य के लिए बहुत बहुत साधुवाद - श्री 1008 कल्याण दास जी महाराज, महंत हनुमान गढ़ी, अयोध्या। डॉ. हरिबंश झा द्वारा रचित यह पुस्तक नेपाल और भारत के बीच आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी सिद्ध होगी। यह न केवल दोनों देशों के सरकारी स्तर पर सहयोग को प्रगाढ़ बनाएगी, बल्कि जन-जन के बीच आपसी मित्रता, आस्था और सद्भाव के सेतु को भी और मजबूत करेगी - अनुत्तमा गांगुली, सचिव, विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन, नई दिल्ली। आदि काव्य रामायण के शास्त्रीय आधार और आनुभविक सर्वेक्षण पर आधारित "जनकपुर-अयोध्या मार्ग" पर प्रो. हरिबंश झा की यह पुस्तक बहुत ही महत्वपूर्ण और सामयिक है। पुस्तक में इस मार्ग के गहन विवरण के साथ-साथ इसके आध्यात्मिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनयिक निहितार्थों का बहुत ही गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है - डॉ. अनूप कुमार गुप्ता, अन्तरराष्ट्रीय मामलों के विज्ञ, भारत। प्रोफेसर हरिबंश झा ने जनकपुर-अयोध्या मार्ग को दो राष्ट्रों और उनकी संस्कृति के बीच एक सेतु के रूप में वर्णित करते हुए इसकी विशेष महत्ता उजागर की है। अपनी यात्रा के अनुभवों के आधार पर वे बताते हैं क

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