Ye Mere Log
Kameshwar Prasad Singh · Kautilya Books
₹450
देश और घर हिन्दी मेरा देश है भोजपुरी मेरा घर घर से निकलता हूँ तो चला जाता हूँ देश में देश से छुट्टी मिलती है तो लौट आता हूँ घर इस आवाजाही में कई बार घर में चला आता है देश देश में कई बार छूट जाता है घर मैं दोनों को प्यार करता हूँ और देखिए न मेरी मुश्किल पिछले साठ बरसों से दोनों में दोनों को खोज रहा हूँ। गमछा और तौलिया गमछा और तौलिया दोनों एक तार पर टैंगे सूख रहे थे साथ-साथ वे टँगे थे जैसे दो संस्कृतियाँ जैसे दो हाथ-बायाँ और दायाँ झूलते हुए अगल-बगल तेज धूप में थोड़ी-सी गरमा-गरमी के बाद मैंने सुना- तौलिया गमछे से कह रहा था तू हिन्दी में सूख रहा है सूख, मैं अंग्रेजी में कुछ देर झपकी लेता हूँ।
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