Rani Sahiba
Habib Kaifi · Kautilya Books
रचना और रोशन की प्रेम कहानी के साथ यह उपन्यास धर्म निरपेक्ष, तरक़्क़ीपसंद और सक्रिय हिंदुस्तान की तस्वीर प्रस्तुत करता है। उपन्यासकार की दृष्टि अतीत पर नहीं, भविष्य पर है जो उनकी अपनी ताक़त है। हर लेखक अपनी तरह की दुनिया चाहता है, उसी को नये-नये रूपों में व्यक्त करता है। हबीब कैफ़ी 'रानी साहिबा' के माध्यम से भी वही करते हैं और यह करना जितना महत्त्वपूर्ण है, उतना ही सशक्त यह उपन्यास है। महलों, रजवाड़ों और सामंतों की निजी ज़िन्दगी के ऐसे अनजाने चित्र इस उपन्यास में हैं, जो इतिहास से ओझल हो रहे हैं। उन्हीं भव्य इमारतों में रचना और रानी साहिबा की संवेदनशील दुनिया इस उपन्यास में बेहद मानवीय रूप से चित्रित हुई है। 'रानी साहिबा' से हबीब कैफ़ी ने एक और उपेक्षित लेकिन उर्वर ज़मीन तोड़ी है, जो उनकी विकासमान रचनात्मकता की गवाही है।
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