Yatra: Ek Adrishya Urja ke Sang – 12 Jyotirling

Yatra: Ek Adrishya Urja ke Sang – 12 Jyotirling

Morari Bapu · Kautilya Books

Hindi · Paperback · Edition: N/A

₹1,999

पूज्य मोरारी बापू ने 1008 समर्पित श्रोताओं फ्लावर्स के साथ एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक अभियान शुरू किया, 'याला, एक अदृश्य ऊर्जा के संग!' यह नम्र, अनूठा और उल्लेखनीय याता-वर्णन भगवान शिव को समर्पित श्रेष्ठ मंदिरों, बारह ज्योतिर्लिंगों के पावन पथ को समेटने वाली ऐतिहासिक यात्रा का निरूपण करता है। इतिहास के प्रथम नवतरीय प्रयास के समान इस याला में दो ट्रेनें समानांतर दौड़ीं और 18 दिनों में 12,000 किलोमीटर की उल्लेखनीय दूरी तय की। बर्फीले हिमालय की ऊँचाइयों से हरी-भरी घाटियों तक, विशाल मैदानों से विस्तृत सागरतट तक, यह याला एक विशेष और दुर्लभ अनुभव थी। भगवान शिव के मूर्त प्रतीक स्वरूप ज्योतिर्लिंग भक्तों के लिए अत्यंत महिमामय हैं, प्रत्येक ज्योतिर्लिंग से हिंदू पौराणिक पालों और अनूठी कथाएँ जुड़ी है। याला केदारनाथ के हिमाच्छादित हिमालय क्षेल से शुरू हुई, जहाँ याली हवाई मार्ग, घोड़े, या पैदल पहुँचे। वहाँ से ऋषिकेश पहुँचे, जो बेस स्टेशन था, जहाँ से याला का रेलवे चरण शुरू हुआ प्रत्येक ज्योतिर्लिंग पर, मोरारी बापू और यानी मंदिरों के दर्शन करते, महादेव के दिव्य स्वरूप के साक्षी बनते और रामकथा के आध्यात्मिक संवाद में लिन रहते। रामचरितमानस के ज्ञान के साथ बापू ने प्रत्येक पवित्त स्थल से संबंधित कथाओं, लोकवायिकाओं, और दंतकथाओं का सरल और सुंदर समन्वय किया। 18 दिनों तक, बापू और ओता ट्रेन में रहे। द्वादश ज्योतिर्लिंगों के साथ-साथ जगन्नाथ पुरी, तिरुपति, और द्वारका जैसे पवित्त तीर्थस्थलों पर भी रुके। यह याला सोमनाथ (गुजरात) में सम्पन्न हुई, जो इस याला मार्ग का अंतिम ज्योतिर्लिंग था। इसके बाद याला मोरारी बापू के पैतृक गाँव गाँव और जन्मस्थल, तलगाजरदा के विराम स्थल तक पहुँची। यह पुस्तक याला के भावनात्मक के सौंदर्य को अभिव्यक्त करने, प्रत्येक प • प्रत्येक पड़ाव पर गाई गई कथा के सार को संग्रहित करने, और मंदिरों से जुड़े इतिहास, स्थापत्य, और दंतकथाओं से परिचय कराने का एक विनश्न प्रयास है। यहाँ पहली बार मोरारी बापू के दैनिक नित्यकर्म का विवरण प्रकट हुआ है, जिसमें कुछ अज्ञात, पविक्त, और भावुक क्षण भी संरक्षित हैं।

Buy Now

India's trusted online book store