Antigni (Greek Natak)
Sophocles · Panchsheel Prakashan
विश्व में नाट्य लेखन की परम्परा जिन देशों में सबसे प्राचीन रही है, उनमें यूनान (ग्रीस) का नाम अग्रणी है। नाट्शास्त्र में त्रासदी की अवधारणा यूनानी नाटक की ही देन है। साफ़ोक्लीज़ यूनानी रंगमंच का दूसरा महान् नाटककार था, जिसने 100 से अधिक नाटक लिखे और नाट्योत्सव में 24 बार पुरस्कृत हुआ। साफ़ोक्लीज़ के
विश्व में नाट्य लेखन की परम्परा जिन देशों में सबसे प्राचीन रही है, उनमें यूनान (ग्रीस) का नाम अग्रणी है। नाट्शास्त्र में त्रासदी की अवधारणा यूनानी नाटक की ही देन है। साफ़ोक्लीज़ यूनानी रंगमंच का दूसरा महान् नाटककार था, जिसने 100 से अधिक नाटक लिखे और नाट्योत्सव में 24 बार पुरस्कृत हुआ। साफ़ोक्लीज़ के नाटकों का बीज भाव मनुष्य और उसकी नियति के बीच चलने वाले संघर्ष का रेखांकन है। उसके नाटकों के पात्र जिन्दगी के हालात को बदलने के लिए संघर्षरत रहते हैं। इसके लिए वे अपना सब कुछ दाव पर लगा देते हैं। साफ़ोक्लीज़ के सर्वश्रेष्ठ माने जाने वाले ‘इडीपस रेक्स’ में उसने इडीपस की जिन्दगी को लेकर तीन नाटक लिखे, ‘एन्टीगनी’ उनमें से एक है। इस नाटक में भी एन्टीगनी देवताओं के बनाये नियमों को तोड़ने का साहस दिखाती है। वह जनता के अधिकारों के लिए लड़ने में अपना सर्वस्व बलिदान कर देती है। एन्टीगनी का यह संघर्ष सदियों पुराना है, किन्तु लगता है हालात आज भी वैसे ही हैं। राज्य और राजाओं के बदलने से जनता की स्थितियाँ नहीं बदलतीं। सत्ता कभी भी अपनी खिलाफत स्वीकार नहीं कर पाती। सच सुनना उसे नहीं सुहाता, इसलिए वह सच बोलने वालों की जुबान बंद करती आयी है। किन्तु संसार में मनुष्य की जिजीविषा ने कभी हार नहीं मानी। एन्टीगनी इसी जिजीविषा की प्रतिनिधि है। औरत होते हुए भी वह सच बोलने और सत्ता से टकराने का साहस दिखाती है। वह जनता की आवाज़ बनकर सत्ता को चुनौती देती है। इसलिए एन्टीगनी का संघर्ष आज भी प्रासंगिक लगता है। यूनान के एक प्राचीन क्लासिक नाटक ‘एन्टीगनी’ का यह अनुवाद नाट्य-जगत के लिए अपरिहार्य कृति सिद्ध होगा।
| ISBN-13 | 9788170564034 |
|---|---|
| Author | Sophocles |
| Publisher | Panchsheel Prakashan |
| Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Edition | First |
| Pages | 54 |
| Year | 2007 |
| Subject | Literature & Fiction |
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