Ghananand Kavitt

Ghananand Kavitt

Dr. Rajneesh Bharadwaj · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback

₹100

रीतिकालीन मुक्त काव्य धारा के अग्रणी कवि घनानंद का रीतिकाल के कवियों में विशिष्ट स्थान है, क्योंकि घनानंद के काव्य में हृदय की कोमल भावनाओं और प्रेम की पीर की सहज और मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है। उनके कवित्तों को पढ़कर लगता है कि घनानंद ने अपने हृदय की घनीभूत पीड़ा को अपने कवित्तों में उंडेल दिया है। क

अनुक्रम घनानंद घनानंद की रचनाएँ रीतिमुक्त (स्वच्छंद) काव्यधारा और घनानंद घनानंद की भक्ति भावना घनानंद के काव्य में प्रेम-व्यंजना घनानंद का श्रृंगार-वर्णन घनानंद के काव्य का कला पक्ष घनानंद का सौन्दर्य वर्णन घनानंद के काव्य में प्रकृति चित्रण मूल-ग्रन्थ

AuthorDr. Rajneesh Bharadwaj
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
Pages232
SubjectHindi

Category: Textbooks & Study Guides

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