Samaj Bhasha Vigyan Ki Bhoomika

Samaj Bhasha Vigyan Ki Bhoomika

Tejpal Chaudhary · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: Second, 2006

₹100

समाज भाषा विज्ञान अपेक्षाकृत अर्वाचीन ज्ञानशाखा है। इसका अध्ययन अभी अपने प्रथम चरण में ही है। समाज भाषा विज्ञान की दृष्टि में भाषा केवल ध्वनियों, पदों और वाक्यों का समूह मात्र नहीं है। यह एक सजीव संप्रेषण माध्यम है, और समाज के सम्पूर्ण चिन्तन प्रवाह और आन्तरिक-बाह्य व्यवस्था को अभिव्यक्त करती है। प्

समाज भाषा विज्ञान अपेक्षाकृत अर्वाचीन ज्ञानशाखा है। इसका अध्ययन अभी अपने प्रथम चरण में ही है। समाज भाषा विज्ञान की दृष्टि में भाषा केवल ध्वनियों, पदों और वाक्यों का समूह मात्र नहीं है। यह एक सजीव संप्रेषण माध्यम है, और समाज के सम्पूर्ण चिन्तन प्रवाह और आन्तरिक-बाह्य व्यवस्था को अभिव्यक्त करती है। प्रस्तुत पुस्तक भाषा के इसी पक्ष पर भारतीय सन्दर्भों में विचार करने का प्रयास करती है। पुस्तक को अधिक उपयोगी बनाने के लिए इसमें स्वनिम, रूपिम, भाषा भूगोल और लिपि विज्ञान जैसे आधुनिक विषयों का भी समावेश किया गया है। विश्वास है कि छात्र और अध्यापक इसे उपयोगी पायेंगे और इसका स्वागत करेंगे।

ISBN-139788170561125
AuthorTejpal Chaudhary
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionSecond, 2006
Year1998
SubjectHindi Language & Literature

Category: Textbooks & Study Guides

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