Hindi Shodh-Tantra Ki Rooprekha

Hindi Shodh-Tantra Ki Rooprekha

Dr. Manmohan Sehgal · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback

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विश्वविद्यालय की स्थापना जिन कार्यों के निष्पादन के लिए होती है, उनमें शोध कार्य कराना उसका सबसे महत्त्पूर्ण कार्य होता है। शोध का मूल अर्थ है-ज्ञान के उस अनुषंग को प्रकाश में लाना जिसके विषय में हम अभी तक अभिज्ञ हैं। संसार का सारा वैज्ञानिक तथा ज्ञानात्मक विकास मनुष्य के शोध कार्यों का ही परिणाम है

विषय-सूची प्रथम खण्ड सैद्धान्तिक पक्ष 1. अनुसंधान (क) अनुसंधान का स्वरूप, (ख) अनुसंधान का प्रयोजन, (ग) अनुसंधान में तथ्यों का उपयोग, (घ) अनुसंधान तथा समालोचना। 2. अनुसंधान के प्रकार (क) शुद्ध साहित्यिक शोध, (ख) अन्तरविधावर्ती शोध, (क-i) साहित्यिक शोध, (क-ii) भाषावैज्ञानिक शोध, (क-iii) भाषा सर्वेक्षण की विधि, (क-iv) काव्य-शास्त्रीय शोध, (क-v) साहित्येतिहास सम्बन्धी शोध, (क-vi) तुलनात्मक साहित्यिक शोध, (क-vii) लोक-साहित्य सम्बन्धी शोध। (ख-i) साहित्य की समाज-शास्त्रीय शोध, (ख-ii) साहित्य की मनोवैज्ञानिक शोध, (ख-iii) साहित्य की सौन्दर्यशास्त्रीय शोध, (ख-iv) साहित्य की ऐतिहासिक शोध। 3. पाठ-शोध की विधि (पाठालोचन) (i) प्रकाशित ग्रन्थों का पाठ-निर्धारण, (ii) अप्रकाशित ग्रन्थों का पाठ निर्धारण, (iii) पाण्डुलिपियों में विकृतियों के कारण तथा उनका वर्गीकरण, (iv) पाण्डुलिपियों की विभिन्न उपलब्ध प्रतिलिपियों को मिलाने का ढंग। 4. शोध की विभिन्न पद्धतियाँ आलोचनात्मक, शास्त्रीय, भाषा-वैज्ञानिक और शैली वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक, सर्वेक्षण, समस्यामूलक, क्षेत्रीय, आगमन-निगमन वैज्ञानिक पद्धति-मूल तत्त्व, व्यक्तिपरक गुण, वैज्ञानिक पद्धति के सोपान। अनुभवाश्रित पद्धति-विशेषताएँ, सीमाएँ और सम्भावनाएँ। सामाजिक पद्धति-मूल अर्थ, मुख्य संघटक, मूल उद्देश्य, विधियाँ, सीमाएँ। 5. शोध की प्रायोगिक विधियाँ (शोध-सामग्री संकलनार्थ) (क) प्रश्नावली विधि, (ख) साक्षात्कार विधि। 6. शोध के विविध आयाम/पक्ष (i) विविध पक्ष, (ii) आयाम, (iii) हिन्दी साहित्यिक शोध-कार्य की उपलब्धि, (iv) शोध-प्रबन्धों की वर्तमान स्थिति, (v) शोध प्रबन्धों से इतर शोधात्मक समीक्षा-ग्रन्थों की स्थिति। 7. शोध विषय : समस्याएँ-समाधान हिन्दी शोध-सम्भावनाएँ। द्वितीय खण्ड व्यावहारिक पक्ष 8. साहित्यिक शोध के पारिभाषिक (क) सिद्धान्तपरक पारिभाषिक तथ्य, अवधारणा, प्राक्कल्पना, सिद्धान्त। (ख) पद्धतिपरक पारिभाषिक- आगमन, विश्लेषण, सर्वेक्षण, मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन। (ग) प्रस्तुतिपरकता सम्बन्धी पारिभाषिक – वर्गीकरण, शोध-प्रबन्ध, अनुबन्ध, आवधिक-पत्र। (घ) व्यक्तिपरक पारिभाषिक – शोधार्थी, निर्देशक, परीक्षक। 9. शोध के निमित्त (क) शोधार्थी-व्यक्तित्वपरक गुण, व्यावहारिक गुण, योग्यतापरक गुण। (ख) निर्देशक- व्यक्तित्वपरक गुण, व्यावहारिक गुण, योग्यतापरक गुण। (

AuthorDr. Manmohan Sehgal
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
Pages184
SubjectHindi Language & Literature

Category: Textbooks & Study Guides

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