Swatantryottar Bharat: Vishvaghat

Swatantryottar Bharat: Vishvaghat

K.L. Kamal · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback

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स्वातंत्र्योत्तर भारत की राजनीति पर आधारित यह उपन्यास वर्णनात्मक यथार्थ में भावनात्मक सत्य तलाशने का एक प्रयास है। पूर्व गृह सचिव वोहरा की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में माफिया एक समानान्तर सरकार चला रहा है। भारतीय राज व्यवस्था की केन्द्रीय समस्या एक प्रभावशाली, जनतांत्रिक, पारदर्शी, संवेदनशील एवं उत्

स्वातंत्र्योत्तर भारत की राजनीति पर आधारित यह उपन्यास वर्णनात्मक यथार्थ में भावनात्मक सत्य तलाशने का एक प्रयास है। पूर्व गृह सचिव वोहरा की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में माफिया एक समानान्तर सरकार चला रहा है। भारतीय राज व्यवस्था की केन्द्रीय समस्या एक प्रभावशाली, जनतांत्रिक, पारदर्शी, संवेदनशील एवं उत्तरदायी राज्य का अवसान है। कानून निर्माताओं और कानून भंजकों के बीच लक्ष्मण रेखा लुप्त हो गई है तथा उनका अशुभ और घातक गठबन्धन भ्रष्टाचार को शक्ति एवं वैधता प्रदान करता है। वह दुर्दिन सन्निकट है जबकि शिखर पर पहुँचने की सीढ़ी हिंसा, भ्रष्टाचार एवं अपराध में लिप्त हो गयी। उपन्यास में रेखांकित वेदना यह है कि जनतंत्र संकटग्रस्त है जबकि सिविल सोसाइटी निष्प्रवाह और निर्जीव हो गई है।

ISBN-139788170563303
AuthorK.L. Kamal
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
Pages128
Year2005
SubjectLiterature & Fiction

Category: Literature , Fiction & Non-Fiction

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