Jungle mein Dangal

Jungle mein Dangal

Ajay Anuragi · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: First, 2026

₹148.75 ₹175 15% off

“जंगल में दंगल” उपन्यास अपने पर्यावरण के विभिन्न घटकों को जानने एवं समझने की दृष्टि से रोचक शैली में लिखा गया है। छोटी आयु वर्ग के बच्चों के मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर इस उपन्यास की रचना की गयी है। जंगल में छोटे-बड़े का भेदभाव दूर करते हुए सामूहिक आनन्दोत्सव में सहभागी बनते पात्रों से जीवंत दृश्यो

बाल साहित्य लिखना कठिन है। क्योंकि बच्चों को समझ पाना सरल नहीं। देखा जाए तो बच्चे अब जल्दी बड़े होने लगे हैं। फिर भी कितने ही बड़े हो जाएँ, उन्हें जीव-जन्तुओं-वनस्पतियों से प्रेम होता ही है। जंगल और जंगल के जानवरों के प्रति उनका लगाव बना रहता है। इसीलिए वे कार्टून, खासकर जानवरों के कार्टून देखना पसन्द करते हैं। यदि किसी भी बच्चे के सामने कुत्ता, बिल्ली, खरगोश आदि को लाया जाए तो वह सबको छोड़कर उनके साथ खेलने में रुचि अधिक दिखाएगा। इसका मतलब है कि बच्चों को प्रकृति प्रिय होती है। यही कारण रहा कि इस उपन्यास की थीम जंगल चुनी गयी। राजस्थान में अधिकांश जंगली भूभाग अरावली की पहाड़ियों के बीच फैला हुआ है। गर्मियों में जंगल पूरा सूख जाता है। पेड़ भी सूखे पत्तों के साथ खड़े दिखायी देते हैं। ऐसे में धूप और गर्मी जानवरों को भी सताती रहती है। उनके लिए खाद्यान्न संकट भी बना रहता है। सरिस्का और रणथम्भौर के जंगलों के भ्रमण पश्चात् मैंने जो कुछ अनुभव किया, वह इस उपन्यास में उतर आया है। इस वर्ष रणथम्भौर के जंगल में आयी बाढ़ ने जंगल को तहस-नहस कर डाला। जीव-जन्तुओं को पानी से जान बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। जंगल के लिए यह नयी आपदा थी। इस घटना को भी कथा में पिरो दिया गया है। मानव विकास क्रम के साथ ही जंगल विकास क्रम की कथा समय के उन्नत बदलाव को प्रदर्शित करने के लिए जरूरी समझी गयी और वह भी इस कथा प्रवाह में जुड़ गयी है। हम सब जानते हैं कि जंगल का जीवन भिन्न तरह का होता है। वहाँ नियम, नीति और नीयत का कोई प्रावधान नहीं होता और न उनके पालन की कोई बाध्यता ही होती है। फिर भी बालकों के समक्ष जंगल के माध्यम से श्रेष्ठ एवं व्यवस्थित जीवनचर्या का उदाहरण रखा जाए तो उनमें भी प्रेरणा का प्रसार हो सकेगा, ऐसी मेरी मान्यता है। नैतिकता और ईमानदारी जीवन का सिद्धान्त बने यह कामना इस कथानक का प्रच्छन्न सार है। बाल पाठक ही बता सकेंगे कि उनको यह उपन्यास कैसा लगा? उनकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

ISBN-139789349111189
AuthorAjay Anuragi
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionFirst, 2026
Pages80
Year2026
SubjectChildren’s Books

Category: Children's & Young Adults

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