Charumati-Parinaya (Aitihasik Upanyas)

Charumati-Parinaya (Aitihasik Upanyas)

Omprakash Sharma 'Mahamouni' · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: First, 2006

₹170 ₹200 15% off

चारुमती-राजसिंह की प्रेमकथा पर आधारित यह ऐतिहासिक उपन्यास, राजस्थान के शौर्य और पराक्रम की गाथा कहता है। यह एक लंबे कालखंड की घटनाओं को कुशलता से विन्यस्त करते हुए पाठक को इतिहास के जीवंत वातावरण में रमाए रखता है।

किसी ऐतिहासिक आख्यान को औपन्यासिक कृति में परिणत करना लेखक के लिए बहुत । जोखिमभरा काम होता है। ऐसे आख्यान को उपन्यास के लिए चुनना और भी चुनौतीपूर्ण होता है जिसके विषय में इतिहासकार ही एकमत न हों। जैसे इस उपन्यास की नायिका चारुमती का नाम कहीं प्रभावती मिलता है तो कहीं चंचलकुमारी। यों चारुमती-राजसिंह की प्रेमकथा का गायन हमारे लोक में होता रहा है पर लोक हर कथा को अपनी तरह से रूपायित करता है। “चारुमती परिणय” के लेखक ने इस कथा से सम्बन्धित सभी ऐतिहासिक स्त्रोतों को खंगालने और गहराई से समझने का प्रयास किया है और तभी इसे उपन्यास के रूप में प्रस्तुत किया है जब वह इस कथा की विश्वसनीयता के प्रति आश्वस्त हो गया है। वस्तुतः चारुमती-राजसिंह की कथा इन दो पात्रों भर की कथा नहीं है बल्कि एक बड़े कालखण्ड में हुए बलिदानों की हृदयस्पर्शी कथा है। जैसे इस कथा के इर्दगिर्द राजस्थान का शौर्य और पराक्रम हिलोरें ले रहा है और चारुमती और राजसिंह का परिणय तो उस समस्त आख्यान की परिणति भर है। यह इस उपन्यास की बहुत बड़ी विशेषता है कि लेखक ने एक लम्बे कालखण्ड की घटनाओं को इस उपन्यास में ऐसी कुशलता से विन्यस्त किया है कि उपन्यास कहीं भी घटना- बोझिल या पाठक पर हावी नहीं होता। इसके विपरीत उपन्यास पाठक को अपने साथ बाँधे रहता है इस खूबी के साथ कि पाठक को लगता है कि वह स्वयं घटनाओं के बीच में है और उपन्यास का ही कोई पात्र है। यही लेखक की उपलब्धि है। लेखक को यह सफलता इस उपन्यास की भाषा के साधने से मिली है जिसमें उसने राजस्थान के इतिहास को जीवंत कर दिया है। यह कथा जितनी रोचक और मर्मस्पर्शी है उतना ही विश्वसनीय और स्पंदनयुक्त है ऐतिहासिक वातावरण जो पाठक को रमाये रखता है। इतिहास और कला का यह मणि कांचन योग इस उपन्यास को हिन्दी की एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक औपन्यासिक कृति बना देता है।

ISBN-139788170563877
AuthorOmprakash Sharma 'Mahamouni'
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionFirst, 2006
Pages180
Year2006
SubjectLiterature & Fiction

Category: Literature , Fiction & Non-Fiction

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