Titli

Titli

Jaishankar Prasad · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: Second, 2008

₹170 ₹200 15% off

जयशंकर प्रसाद का यह उपन्यास ग्रामीण जीवन की समस्याओं, सामंती शोषण और धार्मिक पाखंड का यथार्थवादी चित्रण करता है। यह प्रेम, विवाह और सामाजिक विषमताओं जैसे सवालों पर विचार करते हुए मानवीय संबंधों पर आधारित एक आदर्श समाज का सपना देखता है।

अमर कवि, नाटककार और कथाशिल्पी जयशंकर प्रसाद का ‘तितली’ उपन्यास प्रमुख रूप से ग्राम्य जीवन तथा उससे जुड़ी समस्याओं का समग्र चित्र प्रस्तुत करता है। यह कृति एक ओर इन्द्रदेव को लेकर सामन्ती वातावरण का चित्रण करती है तो दूसरी ओर बाबा रामनाथ और मधुआ ग्रामीण जीवन का प्रकाशन करते हैं। इन्द्रदेव और शैला ग्राम्य जीवन का उद्धार करने का प्रयत्न करते हैं। बैंक, अस्पताल, ग्राम सुधार आदि की योजनाओं को क्रियान्वित करने का वे प्रयास करते हैं। मधुबन के चरित्र से भूमिहीन किसानों में व्याप्त क्रान्ति- विद्रोह के भाव प्रकट हो जाते हैं। पाठक को सामन्ती व्यवस्था के क्षरण की सूचना इस उपन्यास में मिलती है। महाजनों का शोषण, महंतों का पाखंड लेखक ने पूरी कुशलता से चित्रित किया है। इस उपन्यास का फलक वैसी ही समस्याओं से आवेष्ठित है, जैसे ‘गोदान’ का है, हालांकि इस उपन्यास का क्षितिज उतना व्यापक नहीं है। बाबा रामनाथ भारतीय उदार मानवता के प्रतीक हैं। यद्यपि वे कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाना चाहते हैं। इन्द्रदेव के परिवार की घटनाओं से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि संयुक्त परिवार टूट रहे हैं। इन्द्रदेव और शैला अन्त में भारतीय संस्कृति के उच्च मूल्यों को स्वीकार कर लेते हैं। ‘तितली’ उपन्यास में ग्रामीण जीवन के साथ कलकत्ता के शहरी जीवन के माध्यम से नगर जीवन के संकेत भी मिलते हैं। उपन्यास की कथावस्तु बहुत सुगठित और संग्रथित है। ग्राम तथा नगर दोनों जीवन की कथाओं को लेखक ने सहज रूप से जोड़ दिया है। सभी घटनाएँ स्वाभाविक हैं। भाषा-शैली में प्रसाद का कवित्व छलक आया है। ‘तितली’ का अन्त भी बहुत काव्यमय है। कुल मिलाकर यह प्रसाद की एक परिपक्व कृति है, जिसका हिन्दी उपन्यास साहित्य में ऐतिहासिक महत्त्व है।

ISBN-139788170564317
AuthorJaishankar Prasad
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionSecond, 2008
Pages168
Year2008
SubjectLiterature & Fiction

Category: Literature , Fiction & Non-Fiction

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