Ghar Apana-Apana
Shashibhushan Singhal · Panchsheel Prakashan
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Ghar Apana-Apana शशिभूषण सिंघल का उपन्यास ‘घर अपना-अपना’ भारतीय घरों की पहचान और उनकी पारिवारिकता को दर्शाता है, जो टूट-फूट के बाद भी बनी हुई है। यह कृति गिरीश बाबू के बेटे राजीव के ऑस्ट्रेलिया जाने, बेटी सुलक्षणा के आत्मनिर्भर बनने, और अशोक के माता-पिता के साथ रहने जैसे विविध पारिवारिक रूपों को रोच
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