Khula Bazar Urf Jhumari Tilaiya

Khula Bazar Urf Jhumari Tilaiya

Ashok Priyadarshi · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: First, 2005

₹170 ₹200 15% off

Khula Bazar Urf Jhumari Tilaiya ‘खुला बाज़ार उर्फ़ झुमरी तिलैया’ अशोक प्रियदर्शी का एक विशिष्ट व्यंग्य-संकलन है, जिसमें ‘अमृतसर के ताँगेवालों की ज़बान’ की तरह महीन मार करती चलती है। यह संग्रह कहानी या ललित निबंध का आस्वाद देते हुए, विषय-वैविध्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और लेखक की भाषा का अपना अंदा

खुला बाज़ार उर्फ़ झुमरी तिलैया’ एक विशिष्ट व्यंग्य-संकलन है। लेखक के इन व्यंग्य- आलेखों को पढ़ते हुए पं. चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ की कहानी ‘उसने कहा था’ में अमृतसर के ताँगेवालों के संदर्भ में पंक्ति याद आती है- ‘अमृतसर की गलियों के ताँगेवालों की ज़बान महीन मार करती चलती है’। इन आलेखों में इस महीन मार से आपका साबका बार-बार पड़ेगा। ‘… उर्फ झुमरी तिलैया’ प्रचलित अर्थ में आम व्यंग्य-संकलनों की तरह नहीं है, क्योंकि ये कभी आपको कहानी का आस्वाद देते हैं, कभी ललित निबन्ध का। आलेख से गुजरते हुए पाठक आनन्द लेता है, किन्तु रचना पूरी पढ़कर जब वह प्रकृतिस्थ होता है तब उसे लगता है, अरे हाँ, कैसा विद्रूप फैला है हर तरफ। ये व्यंग्य विषय-वैविध्य की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण हैं। इतनी छोटी-छोटी विसंगतियों पर प्राय: पाठक की नज़र नहीं जाती। एक समय अपनी कहानियों और व्यंग्य कविताओं के लिए चर्चा में रहे वरिष्ठ साहित्यकार अशोक प्रियदर्शी की भाषा का अपना अंदाज़ भी इन्हें अन्य व्यंग्य-लेखकों से अलग पहचान देता है। इस पुस्तक को एक बार हाथ में लेने के बाद इसे पूरा पढ़ जाने के बाद ही आपके जी को सुकून मिलेगा।

ISBN-139788170563310
AuthorAshok Priyadarshi
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionFirst, 2005
Pages160
Year2005
SubjectLiterature & Fiction

Category: Literature , Fiction & Non-Fiction

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