Vakratund
Udbhraant · Panchsheel Prakashan
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कविवर उद्घान्त का नया खंडकाव्य उनकी बहुचर्चित छन्द कविता ‘रुद्रावतार’ के बाद ‘वक्रतुण्ड’ शीर्षक से आया है। यह काव्य भी उतना ही नवीन, प्रेरक और समकालीन जीवन के विरोधाभासों से जूझने का एक नया प्रयोग है। ‘वक्रतुण्ड’ श्रीगणेश का एक नाम है। इस काव्य में वक्रतुण्ड के शौर्य्य का वर्णन तो संक्षेप में ‘असुरा
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