Raste Band Nahi Hote

Raste Band Nahi Hote

Hetu Bharadwaj · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: Second, 2020

₹270 ₹300 10% off

Raste Band Nahi Hote हेतु भारद्वाज की कहानियाँ व्यापक युगीन तनावों—गाँव और नगर का तनाव, आर्थिक तनाव, सामाजिक संबंधों का तनाव—को केंद्रवर्ती वस्तु तत्त्व के रूप में नियोजित करती हैं। ये कहानियाँ समाज की विविध परतों को छानकर, मानवीयता के पक्ष को प्रबलता से उजागर करती हैं और व्यवस्था के खोखलेपन तथा नौक

व्यापक युगीन तनावों को समेटते और उसे केन्द्रवर्ती वस्तु तत्त्व के रूप में नियोजित करते हुए कथाकार हेतु भारद्वाज अपनी तनावधर्मी सहज कहानियों के लिए प्रख्यात हैं। गाँव और नगर का तनाव, आर्थिक तनाव, सामाजिक सम्बन्धों का तनाव, संस्थानिक तनाव, प्रतिष्ठानी तनाव, वैयक्तिक तनाव और इस प्रकार विविध बहुआयामी तनावों को वैचारिक चित्रमयता प्रदान करते हुए कथाकार पाठकों को बहुत दूर तक प्रभावित करता है। स्थिति के तनाव और तनाव की स्थिति में जो अन्तर है उसे इन कहानियों में बहुत सूक्ष्मता के साथ प्रस्तुत किया गया है। कथाकार ने समाज की विविध परतों को छाना है। उसने गाँव की अकथनीय दरिद्रता से लेकर नगर की अभिजात समृद्धि को निकट से, कथाकार की आँखों से देखा है, उसे भोगा है तथा उसके विषय में उसकी एक विशिष्ट दृष्टि है। अपनी इस दृष्टि के प्रति आग्रह को लेकर वह पाठकों के ऊपर अपना कोई विचार थोपना नहीं चाहता, तथापि पाठकों के पास असहमत होने के लिए वह कोई मार्ग नहीं छोड़ता। उसकी कलात्मक घेरेबन्दी बहुत लचीली होती है। राजनीतिक हड़ताल और सामाजिक बिखराव-तनाव से लेकर वैयक्तिक आत्मपीड़न की विविध जीवन-भूमियों को वह अन्वेषित करता चलता है। आश्चर्य है कि सामान्य भाषा और सहज चित्रों के माध्यम से कथाकार पैनी चोट करता चलता है। कहानियों के पात्रों में एक जुझारू व्यक्ति सुलगता हुआ सक्रिय है और वह कथाकार की सर्वथा तटस्थ नहीं सम्पृक्त मानसिकता में सृजनशीलता का परिचायक है। वास्तव में हेतु भारद्वाज की कहानियों में मानवीयता का पक्ष ही सबसे प्रबल है और उसी को केन्द्र में रखकर वह चीजों को कुरेदता चलता है। हेतु भारद्वाज की कहानियों में आम लोगों के जिये जाते समकालीन जीवन ‘के प्रति आन्तरिक सम्मृक्ति है। व्यवस्था के खोखलेपन और नौकरशाही के नग्न नृत्य के बीच आर्थिक विवशताओं में टूटते मध्य वर्ग की पीड़ा इन कहानियों में पूरी तीव्रता के साथ उभरी है। सनातन मानवीय मूल्यों की बहुत गहन अनुभूति कहानियों के माध्यम से पाठक की चेतना को स्पर्श करती चलती है, यह अनुभूति इन कहानियों की बनावट में बहुत सघन भाव से डाली गयी है और इनकी यह आन्तरिक प्रामाणिकता पाठकों को झकझोरती भी है।

ISBN-139788170562153
AuthorHetu Bharadwaj
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionSecond, 2020
Pages176
Year2000
SubjectLiterature & Fiction

Category: Literature , Fiction & Non-Fiction

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