Sanskrit Vyakaran Evam Nibandh Rachna

Sanskrit Vyakaran Evam Nibandh Rachna

Dr. Roopnarayan Tripathi · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: Second, 2009

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संस्कृत-व्याकरण के जटिल नियमों को सरल बनाने वाली यह पुस्तक, महर्षि पाणिनि से लेकर वरदराज तक की परंपरा को सोदाहरण प्रस्तुत करती है। वर्णोच्चारण-स्थान, सन्धि, समास और नूतन शब्दावली के समावेश से यह आपकी संस्कृत रचना-क्षमता को विकसित करने के लिए एक उत्कृष्ट साधन है।

संस्कृत-व्याकरण को महर्षि पाणिनि ने सूत्रबद्ध कर जो परिष्कृत स्वरूप दिया, उसका वार्तिककार कात्यायन एवं भाष्यकार पतंजलि ने पल्लवनं किया और वरदराज ने उसे सरल-सुग्राह्य बनाने का सुन्दर प्रयास किया। प्रस्तुत पुस्तक में संस्कृत-व्याकरण के उन सरल नियमोपनियमों को सोदाहरण उपन्यस्त कर वर्णोच्चारण-स्थान, सन्धि-समास, उपसर्ग- प्रत्यय, उपपद विभक्ति-कारक आदि के साथ संस्कृत की लोकोक्तियों एवं व्यवहारयोग्य नूतन शब्दावली का भी समावेश इस तरह किया गया है कि अध्येता का संस्कृत में रचना-क्षमता का विकास हो सके। प्रमुख प्रत्ययों तथा उनसे निष्पन्न रूपों का समावेश एवं उपपद कारक के प्रयोगों से अशुद्धि- संशोधन एवं वाच्य-परिवर्तन आदि ज्ञान कराया गया है। रचना-अनुवाद की दृष्टि से सभी प्रमुख शब्द- रूपों एवं धातु-रूपों को देकर अभ्यास-चारिकाएं दी गई हैं। साथ ही पत्र-रचना एवं निबन्ध-लेखन से परिचय कराया गया है। प्रमुख छन्दों के लक्षण एवं संगति-निर्देश का सोदाहरण विवेचन द्रष्टव्य है। भाषागत क्षमता एवं रचनागत विशिष्टता का दृष्टिकोण इसमें आद्यन्त रहा है जो कि स्नातक स्तरीय एवं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप उपयोगी विषय-वस्तु से समन्वित है।

ISBN-139788170563266
AuthorDr. Roopnarayan Tripathi
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionSecond, 2009
Pages256
Year2005
SubjectSanskrit

Category: Textbooks & Study Guides

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