Mohan Rakesh Ke Sahitya Me Patra

Mohan Rakesh Ke Sahitya Me Patra

Dr. Laxhmi Sharma · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback

₹240 ₹300 20% off

मोहन राकेश अपने पात्रों के माध्यम से जिन्दगी के यथार्थ की बेतरतीब तसवीर प्रस्तुत करते हैं। उनके पात्र, चाहे मिथकीय हों या आधुनिक, अपनी अर्थवत्ता में पूर्णतः समकालीन हैं। जीवन की त्रासदियों, अस्तित्व संकट तथा मूल्य-संक्रमण की स्थितियों से गुजरते हुए ये पात्र अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं के नीचे दबे बिखर

मोहन राकेश अपने पात्रों के माध्यम से जिन्दगी के यथार्थ की बेतरतीब तसवीर प्रस्तुत करते हैं। उनके पात्र, चाहे मिथकीय हों या आधुनिक, अपनी अर्थवत्ता में पूर्णतः समकालीन हैं। जीवन की त्रासदियों, अस्तित्व संकट तथा मूल्य-संक्रमण की स्थितियों से गुजरते हुए ये पात्र अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं के नीचे दबे बिखर-बिखर जाते हैं। तथापि उनकी संवेदनशीलता उन्हें नियति बोध के संश्लिष्ट व्यक्तित्व में तब्दील कर देती है किन्तु उनकी आत्मसंकुलता उन्हें असामान्य बना देती है। संवेदनशीलता और अस्मिबोध के प्रबल संघात से रचे मोहन राकेश के पात्र अनेक विसंगतियों और कुंठाओं से जूझते हैं। उनकी रचनाओं के पात्रों से जूझना उतना ही पेचीदा काम है क्योंकि मोहन राकेश के पात्रों को समझना मोहन राकेश की रचना प्रक्रिया को ही समझना है। यह कृति मोहन राकेश के पात्रों के व्यक्तित्व जो विश्लेषण करती है उससे उनके रचना संसार की यात्रा और सरल हो जाती है। इस प्रकार यह कृति मोहन राकेश के पात्रों से आगे जाकर उनकी रचनाओं के मर्म को उद्घाटित करती है। लेखिका ने बराबर यह प्रयत्न किया है कि उसके विश्लेषण से न केवल मोहन राकेश की रचनाओं की यात्रा हो बल्कि इसके माध्यम से मोहन राकेश के व्यक्तित्व तक भी पहुँच जाए क्योंकि मोहन राकेश के वास्तविक जीवन का भोगा हुआ यथार्थ भी इन पात्रों को आन्तरिक असंतुलन प्रदान करता है। इस प्रकार यह कृति मोहन राकेश के पात्रों के बहाने मोहन राकेश की रचना प्रक्रिया और उनके रचना संसार की पड़ताल करती है।

ISBN-139788170562511
AuthorDr. Laxhmi Sharma
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
Pages240
Year2003
SubjectHindi Language & Literature

Category: Textbooks & Study Guides

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