Sangeet Chintan

Sangeet Chintan

Dr. Surekha Sinha · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback

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संगीत से जीवन-जगत का सहजात और नैसर्गिक सम्बन्ध है, क्योंकि प्रकृति में अनिर्वच आनन्ददायी संगीत की स्वाभाविक उपस्थिति है। संगीत की मूल प्रकृति जीवन को सुख और आह्लाद प्रदान करने वाली है, इस सुख और आह्लाद का शाब्दिक निरूपण सम्भव नहीं है अतः इस आनंद को ब्रह्मानंद के समकक्ष माना गया है। इस रूप में संगीत

संगीत से जीवन-जगत का सहजात और नैसर्गिक सम्बन्ध है, क्योंकि प्रकृति में अनिर्वच आनन्ददायी संगीत की स्वाभाविक उपस्थिति है। संगीत की मूल प्रकृति जीवन को सुख और आह्लाद प्रदान करने वाली है, इस सुख और आह्लाद का शाब्दिक निरूपण सम्भव नहीं है अतः इस आनंद को ब्रह्मानंद के समकक्ष माना गया है। इस रूप में संगीत जीवन का दर्शन है। दूसरी ओर संगीत मनोविज्ञान है, क्योंकि वह मनुष्य की हृदयतंत्री को झंकृत कर उसे सांसारिक कष्टों और तनावों से मुक्त कर अतीन्द्रिय अनुभूति कराता है। इसके लिए मनुष्य को स्वर की साधना करनी पड़ती है और योग का सहारा लेना पड़ता है। संगीत की साधना बहुत सरल भले न हो, मनुष्य के लिए कल्याणकारी अवश्य है, क्योंकि वह मनुष्य की मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों से स्वस्थ और अकुंठ रखती है। लोक संगीत यह कार्य अनजाने ही करता रहता है। इसीलिए संगीत को जीवन का राग कहा गया है। डॉ. सुरेखा सिन्हा की यह कृति एक ओर संगीत के दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक पक्षों का सहज उद्घाटन करती है वहीं संगीत के विविध रूपों और उनकी बारीकियों का अनुशीलन करती है। संगीत विधा के रूप में मनुष्य के लिए कितनी आवश्यक है, इसका विवेचन इस कृति में बड़े तार्किक ढंग से किया गया है। संगीत साधकों तथा संगीत के विद्यार्थियों के लिए यह कृति अत्यन्त उपादेय सिद्ध होगी, ऐसा हमारा विश्वास है।

ISBN-139788170564409
AuthorDr. Surekha Sinha
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
Pages160
Year2008
SubjectIndian Culture & History

Category: Textbooks & Study Guides

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