Samajik Vicharak
Virendra Prakash Sharma · Panchsheel Prakashan
आलोच्य कृति ‘सामाजिक विचारक’ समाजशास्त्र के छः विचारकों-तीन पश्चिम के और तीन भारतीय-की जीवनी, शिक्षा, इन पर अन्य विद्वानों का प्रभाव, प्रमुख रचनाएँ, मूल विचार, उद्देश्य, अभिग्रह, पद्धति, परिप्रेक्ष्य, उपागम, सिद्धान्तों और योगदान आदि का क्रमबद्ध और व्यवस्थित विवेचन प्रस्तुत करती है। परस्पर सम्बन्धित
आलोच्य कृति ‘सामाजिक विचारक’ समाजशास्त्र के छः विचारकों-तीन पश्चिम के और तीन भारतीय-की जीवनी, शिक्षा, इन पर अन्य विद्वानों का प्रभाव, प्रमुख रचनाएँ, मूल विचार, उद्देश्य, अभिग्रह, पद्धति, परिप्रेक्ष्य, उपागम, सिद्धान्तों और योगदान आदि का क्रमबद्ध और व्यवस्थित विवेचन प्रस्तुत करती है। परस्पर सम्बन्धित विचारधाराओं के अनुसार पाठयोजना कार्ल मार्क्स और डी. पी. मुकर्जी, मैक्स वेबर और राधाकमल मुकर्जी तथा इमाइल दुर्खीम और जी. एस. घुर्ये के क्रम में प्रस्तुत की गई है। मार्क्स के ऐतिहासिक उपागम, द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद, वर्ग एवं वर्ग संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन का विवेचन किया गया है। डी. पी. मुकर्जी के परम्पराओं का द्वन्द्व, कला तथा भारत में साहित्य का विकास पर प्रकाश डाला गया है। मैक्स वेबर के आदर्श प्रारूप, सामाजिक क्रिया का सिद्धान्त, नौकरशाही और धर्म की सविस्तार व्याख्या की गई है। राधाकमल मुकर्जी के सामाजिक विज्ञान का सिद्धान्त, सामाजिक मूल्य, सामाजिक और पारिस्थितिकी सम्बन्धी विचारों का वर्णन प्रस्तुत किया गया है। दुर्खीम के सामाजिक तथ्य, श्रम-विभाजन और आत्महत्या की व्याख्या की गई है। अन्त में घुर्ये के जाति, बन्धुत्व व्यवस्था, अनुसूचित जातियाँ, वर्ग व्यवस्था एवं सामाजिक तनाव सम्बन्धी विचारों को प्रस्तुत किया गया है। आशा है यह कृति समाजशास्त्र एवं अन्य सामाजिक विज्ञान के स्नातकोत्तर, नैट एवं शोध छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
| Author | Virendra Prakash Sharma |
|---|---|
| Publisher | Panchsheel Prakashan |
| Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Pages | 408 |
| Subject | Sociology |
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