Rajasthan Ka Rajnaitik Evam Sanskritik Itihas

Rajasthan Ka Rajnaitik Evam Sanskritik Itihas

Dr. Kaluram Sharma, Dr. Prakash Vyas · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback

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विषय-सूची अध्याय राजस्थान का भौगोलिक परिचय भौगोलिक स्थिति; पर्वतीय प्रदेश; पठारी प्रदेश; मैदानी भाग; रेगिस्तानी क्षेत्र; राजस्थान में नदियाँ; जयवायु और वनस्पति; जन-जीवन पर प्रभाव; पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान के मुख्य राज्य। राजस्थान के इतिहास के मुख्य स्त्रोत मुख्य साधनों का वर्गीकरण; पुरातात्त्विक स

विषय-सूची अध्याय राजस्थान का भौगोलिक परिचय भौगोलिक स्थिति; पर्वतीय प्रदेश; पठारी प्रदेश; मैदानी भाग; रेगिस्तानी क्षेत्र; राजस्थान में नदियाँ; जयवायु और वनस्पति; जन-जीवन पर प्रभाव; पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान के मुख्य राज्य। राजस्थान के इतिहास के मुख्य स्त्रोत मुख्य साधनों का वर्गीकरण; पुरातात्त्विक स्त्रोत- बिजौलिया शिलालेख; नेमीनाथ (आबू) के मन्दिर की प्रशस्ति; चीरवे का शिलालेख; श्रृंगी ऋषि शिलालेख; रणकपुर प्रशस्ति; कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति; रायसिंह प्रशस्ति अर्थात् बीकानेर का इतिहास; आमेर का शिलालेख; राजप्रशस्ति; फारसी शिलालेख; साहित्यक स्त्रोत- संस्कृत साहित्य; ऐतिहासिक ग्रन्थ साहित्य; अभिलेखागारीय स्त्रोत- राष्ट्रीय अभिलेखागारीय स्रोत; राजस्थान अभिलेखागारीय स्त्रोत; अन्य अभिलेखागारीय स्रोत। मध्यकालीन राजस्थान का सामाजिक-आर्थिक जीवन सामाजिक ढांचा; विविध जातियाँ और व्यवसाय; सामाजिक जीवन- संयुक्त परिवार प्रथा; संस्कार; सती प्रथा; कन्या वध; डाकन-प्रथा; औरतों और लड़कियों का क्रय-विक्रय; बाल-विवाह; पर्दा प्रथा; वेश्यावृति; घरेलू दास प्रथा; जौहर; आमोद-प्रमोद एवं वस्त्राभूषण; समाज में धर्म; अर्थ-व्यवस्था- कृषि; व्यापार-वाणिज्य; उद्योग धन्धे। मेवाड़ और दिल्ली सल्तनत (प्रारम्भ से महाराणा सांगा तक) मेवाड़ की शक्ति का अभ्युदय-पृष्ठभूमि; मेवाड़ के गुहिलों का उदय; गुहिल और उसके उत्तराधिकारी; बापा की ऐतिहासिकता; बापा का समय; बापा की चित्तौड़ विजय; बापा के बाद-जैत्रसिंह; जैत्रसिंह के उत्तराधिकारी; रत्नसिंह (1302-1303); राणा हम्मीर; क्षेत्रसिंह; महाराणा लाखा (1382-1397); मोकल (1397-1433); महाराणा कुम्भा; कुम्भा की प्रारम्भिक कठिनाइयाँ; मेवाड़ और मारवाड़; सिसोदिया-राठौड़ संघर्ष; रणमल की हत्या; राजपूत राज्यों के साथ कुम्भा के सम्बन्ध; कुम्भा की मृत्युः कुम्भा की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ; कुम्भा का मूल्यांकन; महाराणा सांगा-ऐतिहासिक पृष्ठभूमि; रायमल के पुत्रों में परस्पर विरोध; सांगा का राज्यारोहण; प्रारम्भिक कठिनाइयाँ; अजमेर और चाकसू की विजय; दिल्ली सल्तनत और सांगा; राणा सांगा का चरमोत्कर्ष; राणा सांगा और बाबर- संघर्ष के कारण; खानवा के पूर्व का घटनाचक्र; खानवा का युद्ध (मार्च, 1527); राणा सांगा की पराजय के कारण; खानवा के युद्ध के परिणाम; राणा सांगा की मृत्यु; राणा सांगा का मूल्यांकन। मारव

AuthorDr. Kaluram Sharma, Dr. Prakash Vyas
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
Pages504
SubjectHistory

Category: Textbooks & Study Guides

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