Suraj Phir Ugega
Tejpal Chaudhary · Panchsheel Prakashan
Suraj Phir Ugega तेजपाल चौधरी का उपन्यास ‘सूरज फिर उगेगा’ एक साहसिक फंतासी है जो समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, अमीर-गरीब की खाई और अंधी आर्थिक स्पर्धा को उजागर करती है। यह अहिंसा, अपरिग्रह और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धांतों की व्यावहारिकता को रेखांकित करते हुए पाठकों को आत्मचिंतन पर विवश करती है,
हाल के कुछ वर्षों में हमारे देश में जिस घातक अर्थ संस्कृति का विकास हुआ है, हर क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और अमीर-गरीब के बीच बहती खाई उसकी क्रूरतम देन है। जिस देश की प्रतिशत जनता आधे पेट सोती हो, होटल, बार और मल्टीप्लैक्स के निर्माण पर देश की प्रगति का ढोल पीटना हमारी सबसे बड़ी ट्रेजडी है। तटस्थ दृष्टि से विचार करें तो आप पायेंगे कि इन स्थितियों के लिए हमारी दोषपूर्ण औद्योगिक नीति जिम्मेदार है। यदि देश के कर्णधार राष्ट्रपिता की ग्राम स्वराज की संकल्पना को अपनाते और बड़े उद्योगों की बजाय कुटीर उद्योगों को तरजीह देते तो आज देश अंधी आर्थिक स्पर्धा और स्वार्थपरता का शिकार न होता। ‘सूरज फिर उगेगा’ उपन्यास एक फेन्टसी है, जो राजनैतिक-सामाजिक क्षेत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार की विभिन्न स्थितियों को अनावृत करने के साथ- साथ अहिंसा, अपरिग्रह और शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धान्तों की व्यावहारिकता को रेखांकित करता है। आप इस उपन्यास में अपने ही जीवन का प्रतिवि देख सकेंगे।
| ISBN-13 | 9788170565536 |
|---|---|
| Author | Tejpal Chaudhary |
| Publisher | Panchsheel Prakashan |
| Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Edition | First, 2011 |
| Pages | 192 |
| Year | 2011 |
| Subject | Literature & Fiction |
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