Paristhitiki Evam Paryavaran
Harishchandra Vyas · Panchsheel Prakashan
Paristhitiki Evam Paryavaran ‘पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण’ हरिश्चंद्र व्यास द्वारा लिखित एक ऐसी पुस्तक है जो पारिस्थितिक-संतुलन और शुद्ध पर्यावरण के महत्व को उजागर करती है। यह विभिन्न प्रदूषणों का प्रामाणिक आधार पर विवरण प्रस्तुत करती है, उनके कारणों, परिणामों और निवारणों के साथ-साथ पारिस्थितिक-संतुलन
पारिस्थितिक-संतुलन और शुद्ध पर्यावरण- ये दो ऐसे शब्द हैं जो सृष्टि की सहायता करते हुए अग्रसर हुए हैं। प्रकृति का दोहन और पर्यावरण की शुद्धता का साहचर्य शताब्दियों पुराना है। एक तरफ पर्यावरण के कवच ने हर किसी देश को सुरक्षा दी है, तो दूसरी तरफ इंसान के सभी क्रिया-कलाप भी पर्यावरण को शुद्ध और प्रदूषण रहित बनाये रखने में सहायक रहे हैं। इंसान एवं प्रकृति का यह साझा प्रयास सदियों से चला आ रहा है। जब तक मनुष्य के मन में पवित्रता रही है तब तक प्रकृति प्रदूषण रहित बनी रही है। सभ्यता के पट-परिवर्तन के साथ प्रकृति के साथ अमानुषिक छेड़छाड़ करके इंसान ने आत्महत्या का नुस्खा स्वयं तैयार कर लिया है। विकास के नाम पर अराजक विजय-यात्रा विभिन्न प्रदूषणों में वृद्धि करके हमें विनाश की ओर ले जा रही है। ‘पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण’ पुस्तक में उन सभी प्रदूषणों का विवरण प्रामाणिक आधार पर पर्याप्त कसावट के साथ सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों से हो रहे परिणामों के कारण एवं निवारण के साथ-साथ सृष्टि में पारिस्थितिक-संतुलन स्थापित करने के प्रसंग में सृजनात्मक एवं व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए गये हैं। पुस्तक की मुख्य विशेषता है कि पारिस्थितिक तंत्र को बिगाड़ने वाले प्रदूषणों की जानकारी सुधी पाठकों को करवाते हुए पर्यावरण-संतुलन करने के उपाय भी विस्तार से सरल भाषा में प्रस्तुत किए गये हैं। पुस्तक में घिसी-पिटी बातों को दोहराया नहीं गया है। नवीनता, मौलिकता और प्रामाणिकता का आग्रह पुस्तक में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। पाठकों के लिए शुद्ध पर्यावरण हेतु चिंतन के नये द्वार खोलने में प्रस्तुत पुस्तक सक्षम है। पर्यावरण संचेतना की अन्तः सलिला भारत सहित पूरे विश्व में एक समान बहाने के लक्ष्य को दृष्टि में रखकर राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उपयोगी सामग्री को पुस्तक के माध्यम से रेखांकित किया गया है। ‘पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण’ पुस्तक पर्यावरण से सम्बन्धित उदाहरण देने और कथाशैली में सृजन के प्रयास के कारण रोचक, पठनीय और ‘अनूठी’ बन पड़ी है।
| ISBN-13 | 9788170562252 |
|---|---|
| Author | Harishchandra Vyas |
| Publisher | Panchsheel Prakashan |
| Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Edition | Second, 2011 |
| Pages | 224 |
| Year | 2001 |
| Subject | Environmental Studies |
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