Hindi Vyangya : Badlte Pratiman

Hindi Vyangya : Badlte Pratiman

Dr. Tejpal Chaudhary · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: First, 2003

₹360 ₹400 10% off

हिंदी व्यंग्य की लंबी यात्रा, उसके विभिन्न रूप-आकारों और बदलते प्रतिमानों का गहन विश्लेषण। यह पुस्तक हास्य-व्यंग्य की भिन्नता, व्यंग्यकार की प्रतिबद्धता और व्यंग्य की शाश्वतता जैसे प्रश्नों की छानबीन करती है, जो व्यंग्यकारों और समीक्षकों के लिए उपयोगी है।

व्यंग्य के प्रतिमान निरन्तर बदलते रहे हैं। शूद्रक के ‘मृच्छकटिक’ से लेकर आज के चिन्तन-प्रधान व्यंग्य तक की लम्बी यात्रा में उसने कितने ही रूप-आकार ग्रहण किये हैं। कभी वह व्यक्तिगत आक्रोश की अभिव्यक्ति का माध्यम बना है, तो कभी हास्य का सहयात्री बनकर सामाजिक विकृतियों पर ठहाका लगाता नजर आया है और कभी स्मित की हल्की-सी रेखा खींचे बिना हमारी संवेदना को झकझोरता दृष्टिगोचर होता है। प्रस्तुत ग्रन्थ में व्यंग्य की इस लम्बी यात्रा के विभिन्न पड़ावों को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है। यथा सन्दर्भ व्यंग्य के शास्त्रीय स्वरूप को भी भारतीय और पाश्चात्य मान्यताओं के आलोक में जाँचा-परखा गया है, जिसके अन्तर्गत हास्य और व्यंग्य की भिन्नता, व्यंग्यकार की प्रतिबद्धता और व्यंग्य की शाश्वतता जैसे प्रश्नों की भी छानबीन हुई है। सरल और स्पष्ट भाषा इस ग्रन्थ की उल्लेखनीय विशेषता है। आशा है व्यंग्यकार और समीक्षक इसे अवश्य पसन्द करेंगे।

ISBN-139788170562504
AuthorDr. Tejpal Chaudhary
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionFirst, 2003
Pages280
Year2003
SubjectHindi

Category: Textbooks & Study Guides

Buy Now

Related books

India's trusted online book store