Samwad Prati Samwad

Samwad Prati Samwad

Hetu Bharadwaj · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: First, 2021

₹360 ₹400 10% off

Samwad Prati Samwad हेतु भारद्वाज की यह पुस्तक ‘संवाद प्रति संवाद’ स्त्री की अस्मिता, पितृसत्तात्मक संस्कारों से मुक्ति, और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सवालों पर एक गहरा चिंतन प्रस्तुत करती है। यह कृति एक स्त्री के अनुभवों और विवेक पर विश्वास न करने के समाज के रवैये को उजागर करती है, और दर्शाती है कि कै

इसी पुस्तक से…. ऐसा नहीं है, मैं ऐसा सोचती भी नहीं। मैंने आपको बताया कि व्यक्तिगत जीवन में मैं बहुत आज्ञाकारिणी और पतिपरायण महिला रही। लेकिन अन्दर कुछ और भी चलता रहा। माँ ने रोका या पति ने रोका। यही तो रोका कि इस शरीर का कहीं और उपयोग नहीं होना चाहिए। नजरें नीची रखनी है, सुन्दर नहीं दिखना है, बाहर कहीं नहीं जाना है जैसे बंधन माँ ने मुझ पर लगाए तो मुझे समझ में आ गया कि ये सारे बंधन मेरे शरीर पर हैं। पढ़े लिखे होने और सारी स्वतंत्रता के बावजूद पति ने भी मुझ पर वही बंधन लगाए जो मेरे शरीर से संबंध रखते थे, कहाँ जाओगी, कहाँ नहीं जाओगी, जाओगी तो मेरे साथ जाओगी, किसी छोटे लड़के के साथ भी नहीं जाओगी। इस सबसे मुझे लगा कि मुझ पर मेरे विवेक पर विश्वास नहीं किया जा रहा है, जो कुछ भी मैं करूंगी वह गलत ही होगा। यह कमोवेश हर स्त्री के साथ होता है पर ऐसा नहीं है कि सब कुछ गलत ही होगा। बहुत सी ऐसी स्थितियाँ हो सकती है जिन पर हमारा जोर नहीं चलता। मान लीजिए आप के साथ ही जा रहे हैं, दो गुण्डे मिल जाते हैं वे छोड़ कर चले जाते हैं या बलात्कार कर जाते हैं तो आप भी नहीं रोक पाएंगे। होगा यही कि हम यहीं कहेंगे कि कुछ नहीं हुआ। तो इतनी छूट तो मिलनी ही चाहिए कि हम अपने विवेक से गलत सही के बीच निर्णय

ISBN-139788170566618
AuthorHetu Bharadwaj
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionFirst, 2021
Pages192
Year2021
SubjectHindi

Category: Textbooks & Study Guides

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