He Puraskar Tumhe Namaskar

He Puraskar Tumhe Namaskar

Puran Sarma · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: First, 2017

₹360 ₹400 10% off

He Puraskar Tumhe Namaskar पूरन सरमा का यह व्यंग्य संग्रह राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विसंगतियों पर करारी चोट करता है। अपने पैंतालीस वर्षों के व्यंग्य-लेखन अनुभव से, लेखक अपनी छोटी-छोटी विसंगतियों को नया मोड़ देकर, विघटित होते मानवीय मूल्यों और पाखंडी शालीनता को निर्वसन करते हैं।

पूरन सरमा व्यंग्य में किसी पहचान को मोहताज नहीं है। पैंतालीस वर्षों के व्यंग्य-लेखन जीवन ने इनके व्यंग्य-लेखन को नये और बोधपूर्ण आयामों के साथ करारी चोट में लपेटकर इतना गहरा प्रहार करते आये हैं कि विसंगतियों की चिंदी-चिंदी कर देती हैं। व्यंग्य आज की लोकप्रिय विधा है और यही वजह है कि लेखक के व्यंग्यात्मक लेख निरंतर देश की पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहे हैं। संकलन की दृष्टि से भी लेखक के सत्रह संग्रह आ चुके हैं, अतः पूरन सरमा पूरी शिद्दत के साथ व्यंग्य के बड़े नाम हैं। छोटी-छोटी राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विसंगतियों को लेखक हर बार नया मोड़ देकर व्यंग्य की चोट पूरे प्रहार से करते हैं। व्यंग्यों में कथा-शैली आने से व्यंग्य पठनीयता का अपना दायरा विशाल करते आये हैं। इस संकलन में संवादों के जरिये ही व्यंग्यकार विघटित होते मानवीय मूल्यों को उघाड़ता है तथा उन विद्रूपताओं को भी निर्वसन करता है, जो जीवन-मूल्यों का पाखण्ड ओढ़े अपने आप को शालीनता से प्रस्तुत करते हैं। यह संग्रह लेखक की पहचान को पूरी दृढ़ता के साथ लेकर चलता है तथा कमजोर पक्ष देखने को नहीं मिलता। लेखक निरंतर मानवीय तथा जीवन-मूल्यों की स्थापना के लिए व्यंग्य के सहारे पूरी सघनता से पैरवी करता है। यही संकलन को नया उजाला और पहचान के साथ रू-ब-रू करेगी।

ISBN-139788170566250
AuthorPuran Sarma
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionFirst, 2017
Pages184
Year2017
SubjectLiterature & Fiction

Category: Literature , Fiction & Non-Fiction

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