Vinoba Bhave : Samajik Rajnetik Chintan

Vinoba Bhave : Samajik Rajnetik Chintan

Dr. Ravindra Kumar Sohoni · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: First, 2013

₹360 ₹400 10% off

Vinoba Bhave : Samajik Rajnetik Chintan डॉ. रवीन्द्र कुमार सोहोनी की यह कृति आचार्य विनोबा भावे के सामाजिक-राजनीतिक चिंतन का विश्लेषण करती है, जो पाश्चात्य विद्वानों की भारतीय राजनीतिक चेतना की शून्यता की भ्रामक अवधारणा का खंडन करती है। यह पुस्तक विनोबा के विवेक को सर्वोपरि मानने, उनके प्रयोगधर्मी च

पाश्चात्य विद्वानों की यह अवधारणा है कि भारत राजनीतिक चेतना की दृष्टि से शून्य रहा है और भारत को राजनीतिक चेतना प्रदान करने का श्रेय पाश्चात्य जगत् को जाता है। पाश्चात्य विद्वानों की इस भ्रामक अवधारणा के फलस्वरूप भारतीय चिन्तन और दर्शन को अत्यधिक हानि उठानी पड़ी। आजादी की लम्बी लड़ाई के दौरान अनेक असामान्य कद के व्यक्तित्व भारत में उभरे, लेकिन आचार्य विनोबा भावे उन सबसे भिन्न थे। किसी किस्म की लीक पर चलना उनके स्वभाव में नहीं था। दरअसल अपने विवेक को सर्वोपरि मानने और उसी के अनुसार बगैर किसी समझौते के आचरण करने का उनका आग्रह उन्हें हमेशा अलग-थलग ही रखता रहा। आचार्य विनोबा मूलतः सुकरात की परम्परा के आचार्य थे, जिनकी मुख्य भूमिका जनमानस को झकझोरने की थी। आचार्य विनोबा स्वातंत्र्योत्तर भारत में किसी पद पर प्रतिष्ठित नहीं हुए तो यह भी उनके जीवन-दर्शन का महत्त्वपूर्ण तत्त्व था। आचार्य विनोबा भावे दार्शनिक और द्रष्टा ही नहीं एक प्रयोगधर्मी चिन्तक भी हैं। समय का एक दौर ऐसा भी आया जब उनके प्रति प्रतिकूलता का वातावरण पैदा हुआ। उनकी भूमिका को समझने की पर्याप्त चेष्टा नहीं हुई, यह खेद का विषय है। आधुनिक भारतीय सामाजिक एवं राजनीतिक चिन्तन की उपेक्षा का कारण विषय-वस्तु की शिथिलता नहीं अपितु पराधीनता के वातावरण में समुचित अवसरों को न मिलना रहा। स्वातंत्र्योत्तर काल में इस दिशा में आशातीत जिज्ञासा का विकास हुआ। फलस्वरूप कई दिग्गज विद्वानों ने इस अछूते पहलू को छुआ और प्रामाणिक विश्लेषण प्रस्तुत किये। व्यवस्थित और विश्लेषणात्मक अध्ययनों के परिणामस्वरूप भारतीय चिन्तन की धाराओं का स्पष्ट विकास प्रारम्भ हुआ।

ISBN-139788170565949
AuthorDr. Ravindra Kumar Sohoni
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionFirst, 2013
Pages208
Year2013
SubjectPolitical Science

Category: History | Politics | Culture

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