Vastra Reshaa Vigyan

Vastra Reshaa Vigyan

Dr. Brinda Singh · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: Second, 2014

₹320 ₹400 20% off

Vastra Reshaa Vigyan मानव-सभ्यता, संस्कृति, सामाजिक प्रतिष्ठा और दैहिक सुंदरता का आधार ‘वस्त्र’ है। डॉ.

मानव-सभ्यता, संस्कृति, सामाजिक प्रतिष्ठा, दैहिक सुन्दरता व आकर्षण का आधार है ‘वस्त्र’। सुन्दर वस्त्रों को धारण कर हम सुन्दर व आकर्षक दिखते हैं। वस्त्रों का मानव मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सुन्दर परिधान से सुसज्जित व्यक्ति का व्यक्तित्व सुन्दर व आकर्षक दिखता है। उचित परिधान से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास एवं आत्मबल उत्पन्न होता है। अतः जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए उचित परिधान का होना नितान्त आवश्यक है। हम क्या खाते हैं? इसे दूसरा व्यक्ति नहीं जान पाता, परन्तु हम क्या पहनते हैं, इस पर सभी लोगों की दृष्टि जाती है। जैसा हम वस्त्र पहनते हैं, वैसा ही हमारा रूप निखार होता है, और लोगों की नजरों में वैसी ही धारणा बनती है। उचित परिधान से सुसज्जित व्यक्ति अनजाने में ही दूसरे लोगों का ध्यान आकर्षित कर लेते हैं और सबका प्रिय बन जाते हैं। इसलिए यह आवश्यक है सुन्दर व आकर्षक रंगों व डिजाइनों वाला वस्त्र धारण किया जाए। मगर मुश्किल तो यह है कि आज बाजार में अनेक प्रकार के रेशों वाले वस्त्र आ चुके हैं, जिन्हें पहचानना मुश्किल है। ऐसी स्थिति में सही दाम देकर सही वस्त्र खरीदना कठिन काम है। अक्सर वह ठगा जाता है। वह पैसे तो रेशम का देता है और वस्त्र रेयॉन का खरीदता है, क्योंकि वह रेशम एवं रेयॉन में भेद नहीं कर पाता है। इतने रंगों, डिजाइनों व चमक-दमक वस्त्रों के समक्ष उसकी आँखें चौंधिया जाती है कि वह कौन-सा वस्त्र खरीदे और कौन-सा नहीं। ऐसी स्थिति में ‘वस्त्र रेशा विज्ञान’ की जानकारी आवश्यक है। प्रस्तुत पुस्तक ‘वस्त्र रेशा विज्ञान’ में उन सभी विषयों पर गहनता से प्रकाश डाला गया है जो न केवल गृह विज्ञानियों के लिए अपितु जन-सामान्य के लिए भी अति आवश्यक एवं उपयोगी है। यह पुस्तक प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी उपयोगी है।

ISBN-139788170565161
AuthorDr. Brinda Singh
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionSecond, 2014
Pages208
Year2010
SubjectHome Science

Category: Textbooks & Study Guides

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